गोपालक संघ ने कहा कि, यात्रा में फतराव के मामे में पकड़े गए गुर्जर समाज के निर्दोष लोगों को छोड़ा जाए, वरना आंदोलन करेंगे।
मध्य प्रदेश के नीमच जिले में हालही में भारतीय दजनता पार्टी द्वारा निकाली जा रही जन आशीर्वाद यात्रा पर पथराव के मामले ने अब तूल पकड़ना शुरु कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस द्वारा एक दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप प्रत्यारोप के बाद अब गोपालक संघ लामबंद हो गया है। संघ की मांग है कि, पुलिस द्वारा मामले में गुर्जर समाज के जिन निर्दोष लोगों को सरकार के दबाव में आकर बिना जांच किए गिरफ्तार किया है, उनकी जांच करने के बाद तत्काल उन्हें छोड़ा जाए। वरना ओबीसी गोपालक संघ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा। इसकी जवाबदेह पुलिस होगी।
इस संबंध में शहर के मेशी शोरूम चौराहे से ओबीसी संगठन के बैनर तले गुजर समाज के लोग इकट्ठा होकर पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे, जहां संगठन की ओर से पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही कहा गया कि, जन आशीर्वाद यात्रा पर पत्थरबाजी के मामले में पुलिस ने सरकार के दबाव में आकर जो कार्रवाई की है, उन्हें छोड़ा जाए। वरना शनिवार को रामपुरा के साथ साथ मनासा थाने का घेराव किया जाएगा।
गोपालकों की चेतावनी
उन्होंने कहा कि, इसके बाद भी अगर पुलिस द्वारा निर्दोषों को छोड़ा नहीं गया तो एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे। यही नहीं, बड़ी संख्या में गोपालक सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इसके अलावा, चरणबद्ध दूध की सप्लाई भी बंद की जाएगी। वहीं, पूरे घटनाक्रम पर नीमच पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने गोपालकों को जांच का भरोसा दिलाते हुए वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही है। बताया जा रहा है कि, अबतक इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार करने की बात कही है। जबकि, दावे के अनुसार, कई लोग पुलिस हिरासत में हैं।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुआ था यात्रा पर पथराव
आपको याद दिला दें कि, जिले के अंतर्गत आने वाली मनासा विधानसभा के चेनपुरिया ब्लॉक के गांव में भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा निकाली जा रही थी, जिसमें पत्थरबाजी की घटना हुई थी। पत्थरबाजी के दौरान जन आशीर्वाद यात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गी, वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। वहीं, जानकारी ये भी सामने आई है कि, गांधी सागर अभ्यारण क्षेत्र में चीता प्रोजेक्ट के गोचर जमीन पर तार फेंसिंग करते हुए पूरे क्षेत्र को अभ्यारण क्षेत्र में ले लिया गया, जिसके चलते करीब 27000 गायों पर खाने पीने का संकट बढ़ गया है। इसी के चलते यहां के गोपालकों द्वारा विरोध किया गया था।