नीमच

नीमच में अफीम किसानों ने कहा जब पट्टे का आधार मार्फिन तो भुगतान गाढ़ता पर क्यों

अफीम काश्तकारों की दो टूक, अफीम सलाहकार समिति की बैठक में किसानों ने उठाए सवाल, सांसद-विधायक की मौजूदगी में किसानों ने रखी मांगें, अफीम मूल्य बढ़ाने और मार्फिन आधारित भुगतान की उठी जोरदार मांग

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Jun 16, 2026
Neemuch Breaking News
‘अफीम उत्पादक कृषक सलाहकार समिति’ की बैठक में अपनी बात रखते हुए अफीम काश्तकार।

नीमच. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) द्वारा ‘अफीम उत्पादक कृषक सलाहकार समिति’ की बैठक में इस बार किसानों की समस्याएं और सुझाव प्रमुखता से छाए रहे। बैठक में किसानों ने खुलकर अपनी बात रखते हुए नारकोटिक्स अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि जब अफीम खेती के पट्टे (लाइसेंस) मार्फिन प्रतिशत के आधार पर दिए जाते हैं, तो किसानों को भुगतान गाढ़ता (कंसिस्टेंसी) के आधार पर क्यों किया जाता है। बैठक में किसानों ने मांग की कि अफीम का मूल्य निर्धारण भी मार्फिन प्रतिशत के आधार पर किया जाए, जिससे उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

किसानों ने रखे नीति और मूल्य निर्धारण से जुड़े सवाल
बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू, नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राजू मोदी, किसान नेता राजेश पाटीदार सहित बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान उपस्थित रहे। सीबीएन की ओर से नारकोटिक्स उपायुक्त निखिल गांधी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि अफीम उत्पादन की गुणवत्ता का आंकलन मार्फिन प्रतिशत के आधार पर किया जाता है और उसी आधार पर अगले वर्ष के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया भी उसी आधार पर होनी चाहिए। किसानों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में गाढ़ता के आधार पर भुगतान होने से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। किसानों ने अफीम के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अफीम का मूल्य बढ़ाया जाना आवश्यक है। इसके अलावा सीपीएस पद्धति से उत्पादित डोडे का मूल्य भी बढ़ाने की मांग की गई। बैठक में अफीम किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने, पट्टों की सुरक्षा और पारदर्शी जांच जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में चर्चा उपरांत किसानों के हित में तैयार किए गए 50 से अधिक प्रस्तावों को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।

सुझावों को अफीम नीति में शामिल करने का आश्वासन
बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने बताया कि अफीम की खेती में अब तेजी से आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण हो रहा है। किसानों को सबसे बड़ी राहत टेस्टिंग प्रक्रिया को लेकर मिली है। नारकोटिक्स विभाग की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में अब मॉर्फिन की जांच 250 टोन की ‘कलर मैचिंग लाइब्रेरी’ से हो रही है। इससे जांच में 100 प्रतिशत पारदर्शिता आई है। इसी का नतीजा है कि पहले जो हर साल 10-10 हजार किसानों के पट्टे कट जाया करते थे, वह सिलसिला अब पूरी तरह से थम गया है। इसके साथ ही ओलावृष्टि से फसल नुकसान पर राहत, चीरा लगने के बाद फसल के मापन और पट्टों के नामांतरण की जटिलताओं को दूर करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में मांग उठी कि किसान की मृत्यु से पूर्व ‘स्व-घोषणा’ को मान्यता मिले। पट्टा प्राथमिकता के आधार पर मृतक की जीवित पत्नी या मां के नाम पर तुरंत किया जाए। इसके अलावा डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट से बाहर करने की पुरानी मांग को भी जनप्रतिनिधियों द्वारा पुरजोर तरीके से उठाया गया। सांसद ने मालवा के किसानों की प्रामाणिकता की तारीफ करते हुए कहा कि वे पूरी ईमानदारी से वैधानिक खेती करते हैं और जनप्रतिनिधि उन्हें उनका पूरा हक दिलाने के लिए दिल्ली तक मजबूती से पैरवी कर रहे हैं। इस महामंथन से अफीम अंचल के किसानों में आगामी नीति से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है।

आगामी अफीम नीति के लिए किसानों के सुझाव
भाजपा किसान मार्चा जिलाध्यक्ष राजू नागदा मोड़ी ने बैठक में किसाों की ओर से सुझाव रखे कि अफीम की बुआई के 15 से 30 दिन के अंदर अफीम की नपती हो। अफीम नीति सितंबर माह में ही जारी हो। अफीम की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा में जोड़ा जाए या फिर अलग से बीमा किया जाए, जिससे किसानों को प्राकृतिक नुकसान के बाद बीमा मिल सके। अफीम के भाव 5000 रुपए प्रति किलो किए जाएं। सीपीएस पद्धति के डोडो के भाव 500 रुपए प्रति किलो किए जाएं। किसी परिवार में एक लाईसेंस है और दो भाई है तो उन्हें दो प्लाटों में बुवाई की अनुमति दी जाए। मार्फिन 3.5 से लाचिंग पद्धति में पट्टे जारी किए जाएं। पुराने वर्षों से किसी कारणवश रुके हुए हो पट्टे बहाल किए जाएं। जिस किसान की अच्छी और ज्यादा मार्फिन है उसे प्रोत्साहन के रुप में रकबा बढ़ाया जाए ताकि दूसरे किसान भी अच्छी व ज्यादा मार्फिन अफीम विभाग को दे। सीपीएस और चीरे वालें दोनों को समान रकबा दिया जाए। विभाग अफीम लाईसेंस मॉर्फिन से देते हैं तो अफीम का मूल्य भी मॉर्फिन के आधार पर दिया जाए जो अभी गाढ़ता के आधार पर दिए जाते हैं। बैठक में किसानों ने न केवल अपनी समस्याएं रखीं, बल्कि नीति सुधार से जुड़े कई व्यवहारिक सुझाव भी दिए। बैठक के दौरान किसानों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। किसानों ने कहा कि हमें उम्मीद है कि बैठक में सामने आए सुझावों को नई अफीम नीति में शामिल किया जाएगा। लंबे समय से लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

Published on:
16 Jun 2026 11:22 am