नीमच

‘गोल्ड क्रस्ट’ की मनमानी पर ग्रामीणों का ‘हल्ला बोल’, खेत में लगी जनता की अदालत, जानें पूरा मामला

Neemuch News :सगराना में 3 दिन से जारी संग्राम जारी है। किसानों ने प्रशासन को दो टूक सुनाया- 'रास्ता दो, वरना फैक्ट्री भूल जाओ'। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाले को नौकरी से निकालने पर भड़के ग्रामीण, अधिकारियों को हटाने की मांग उठी।
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Jan 03, 2026
Neemuch News
'गोल्ड क्रस्ट' की मनमानी पर ग्रामीणों का 'हल्ला बोल' (Photo Source- Patrika Input)

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट

Neemuch News : मध्य प्रदेश के नीमच जिले के अंतर्गत आने वाले सगराना में प्रस्तावित गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री का 'कॉरपोरेट अहंकार' आज ग्रामीणों की एकजुटता के आगे धराशाई हो गया। पिछले 3 दिनों से अपनी जमीन, रास्ते और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे किसानों के आक्रोश की आंच जब प्रशासन तक पहुंची, तो पूरा अमला दफ्तर छोड़कर खेतों की धूल फांकने को मजबूर हो गया।

हालही में सगराना के खेतों में नजारा किसी 'जनता अदालत' से कम नहीं था। दरी पर SDM संजीव साहू, CSP किरण चौहान, तहसीलदार संजय मालवीय और TI निलेश अवस्थी बैठे थे, और सामने आक्रोशित ग्रामीणों का हुजूम था। ग्रामीणों ने अधिकारियों की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रबंधन की ऐसी क्लास लगाई कि कंपनी के नुमाइंदे बगलें झांकते नजर आए।

'CM हेल्पलाइन पर शिकायत करना गुनाह हो गया?'

बैठक का माहौल तब गरमा गया जब ग्रामीण शौकीन मेघवाल ने फैक्ट्री प्रबंधन की तानाशाही का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उसने अधिकारियों के सामने गरजते हुए सवाल किया- 'साहब! कंपनी ने मेरा रास्ता रोका, मैंने न्याय के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की तो कंपनी के अधिकारी गगन तिवारी ने मुझे नौकरी से ही बेदखल कर दिया। क्या शिवराज सरकार की हेल्पलाइन पर शिकायत करना गुनाह है?' इस वाकये ने प्रशासन के सामने फैक्ट्री प्रबंधन के 'तुगलकी रवैये' की पोल खोल दी।

'सगराना बचाओ संघर्ष समिति' का अल्टीमेटम

सरपंच प्रतिनिधि विक्रम सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने हाथ जोड़कर नहीं, बल्कि आंख में आंख डालकर 15 सूत्रीय मांग पत्र रखा। ये मांग पत्र नहीं, बल्कि फैक्ट्री के लिए 'अल्टीमेटम' था, जो इस प्रकार है-

-रास्ता नहीं तो काम नहीं

ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि, पुश्तैनी आम रास्तों पर अगर दीवार उठी तो फैक्ट्री का काम एक इंच आगे नहीं बढ़ेगा। अगर रास्ता बदलना है तो पहले 30 फीट चौड़ा पक्का वैकल्पिक मार्ग बनाकर देना होगा।

-अफसरशाही नहीं चलेगी

ग्रामीणों ने फैक्ट्री अधिकारी गगन तिवारी और दिनेश पांडेय पर अभद्रता और दादागिरी का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल हटाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि, 'जो अफसर किसान की इज्जत नहीं कर सकता, उसे गांव में घुसने नहीं देंगे।'

-जमीन हमारी है तो मर्जी भी हमारी

बिना लिखित सेहमति के किसी किसान की जमीन का अधिग्रहण या उसपर बाउंड्रीवॉल बनाने की कोशिश हुई तो परिणाम गंभीर भुगतने होंगे।

-रोजगार हक है, कोई भीख नहीं

गांव के हर घर से एक व्यक्ति को 'परमानेंट नौकरी' और 50 बीघा में गौशाला निर्माण। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि, वे अपने संसाधनों की कीमत मांग रहे हैं।

प्रशासन की सख्ती: सुधर जाओ, वरना कार्रवाई तय

माहौल की नजाकत और ग्रामीणों के उग्र तेवरों को देखते हुए SDM संजीव साहू और CSP किरण चौहान ने मोर्चा संभाला। उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन को सख्त हिदायत दी कि, कानून हाथ में लेने की कोशिश न करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि रास्तों का सीमांकन कराया जाएगा और सीएम हेल्पलाइन वाले मामले की जांच कर न्याय दिलाया जाएगा।

देखने वाली बात

सगराना के इस आंदोलन ने साबित किया है कि, अब किसान विकास के नाम पर विनाश और मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा। 3 दिन के इस घटनाक्रम ने गोल्ड क्रस्ट प्रबंधन को बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना ये है कि, प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फैक्ट्री प्रबंधन अपना रवैया सुधारता है या फिर सगराना में कोई बड़ा आंदोलन खड़ा होता है।

Updated on:
03 Jan 2026 11:53 am
Published on:
03 Jan 2026 07:22 am