4 मई को अमित शाह पश्चिमन बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं। इसी बीच कोलकाता के निकटवर्ती उत्तर 24 परगना जिले में रविवार को बारासात संगठनात्मक समिति के 15 नेताओं ने एक बार में इस्तीफा दे दिया।
पश्चिम बंगाल भाजपा में कलह का दौर जारी है, पार्टी में एक के बाद एक इस्तीफे दिए जा रहे हैं। ऐसे में खबरें हैं कि बंगाल में पार्टी मतभेदों को दूर करने का जिम्मा खुद गृह मंत्री अमित शाह ने संभाला है। वो 4 मई को पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं। मगर उनके बंगाल पहुंचने से पहले ही पश्चिम बंगाल भाजपा के 15 नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। उपचुनावों में पराजय के बाद से भगवा खेमे को पार्टी के भीतर मतभेदों का सामना करना पड़ रहा है।
तो वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने 5 मई को पार्टी की राष्ट्रिय कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई है। बैठक राज्य में टीएमसी सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली सालगिरह पर बुलाई गई है। ममता बनर्जी ने 5 मई को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पश्चिम बंगाल में जीत के एक साल बाद जहां टीएमसी राज्य में लगातार मजबूत होकर उभरती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी पार्टी में अंतरकलह मची हुई है। बीजेपी के 15 नेता टीएमसी में शामिल हो गए हैं।
उपचुनावों में भाजपा आसनसोल लोकसभा सीट को बरकरार रखने में विफल रही थी, जिसके बाद राज्य सचिव सहित तीन विधायकों ने राज्य पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा नादिया में 14 जिला स्तर के पदाधिकारियों ने उपचुनाव के परिणाों के 48 घंटों के अंदर ही अपना इस्तीफा सौंप दिया।
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खबरों के मुताबिक उत्तर 24 परगना जिले में सभी असंतुष्टों ने जिलाध्यक्ष पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने पार्टी के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने और "अक्षम" चेहरों को ऊपर लाने का भी आरोप लगाया। असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं ने तापस मित्रा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
तो वहीं बारासात जिलाध्यक्ष तापस मित्रा ने इस पर कुछ बोलने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता इन लोगों ने इस्तीफा क्यों दिया है। आपको बता दें पश्चिम बंगाल भाजपा में कई बड़े नाम शामिल हैं। पिछले कई महीनों में राज्य में भाजपा के कुल विधायकों की संख्या 77 से घटकर 70 हो गई है। पार्टी के कई कार्यकर्ता राज्य नेतृत्व से खुश नहीं हैं।
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