नई दिल्ली

403 गवाह, 10 हजार पन्नों की चार्जशीट, 200 करोड़ की रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 4 आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत

200 Crore Extortion Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने 200 करोड़ रुपए की कथित रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े चार आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है और लंबे समय से विचाराधीन कैद में रहने को देखते हुए आरोपियों को राहत दी गई है।
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Updated: 8 Jul 2026, 2:03 PM IST
200 Crore Extortion Case
200 करोड़ की रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 4 आरोपियों को दिल्ली HC से जमानत ( फोटो सोर्स- ANI )

Sukesh Chandrasekhar Case:दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2021 में दर्ज 200 करोड़ रुपए की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) मामले में बड़ी राहत देते हुए सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े चार आरोपियों को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने अरुण मुथु, कमलेश कोठारी, बी. मोहनराज और सुधीर को 2.5 लाख रुपए के निजी मुचलके और दो-दो जमानतदारों के आधार पर बेल मंजूर की। यह मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दर्ज किया गया था।

'ट्रायल जल्द पूरा होना संभव नहीं'

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में 24 आरोपी, 403 गवाह और 10 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट होने के कारण मुकदमे का जल्द पूरा होना संभव नहीं दिखता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपियों को जो भूमिका दी गई है, उसे देखते हुए लंबे समय तक विचाराधीन कैदी (अंडरट्रायल) के रूप में जेल में रखना उचित नहीं है। बता दें कि अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक आरोपी को शीघ्र सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और हर मामले का मूल्यांकन उसकी परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

क्या हैं आरोप और अभियोजन का पक्ष?

अदालत ने कहा कि अरुण मुथु पर किसी से सीधे रंगदारी वसूलने का आरोप नहीं है। अभियोजन के अनुसार उनकी भूमिका सुकेश चंद्रशेखर द्वारा लीना पॉलोस को भेजी गई रकम के प्रबंधन, अकाउंटिंग एंट्री कराने, संपत्तियां और लग्जरी कारें खरीदने, उनके पार्किंग प्रबंध और फिल्म निर्माण जैसी गतिविधियों तक सीमित थी, जिसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था।

आपको बता दें कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि मुथु और अन्य चेन्नई स्थित आरोपियों को संगठित अपराध सिंडिकेट की गैरकानूनी गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। इतना ही नहीं इसके साथ यह भी दावा किया गया है कि वे कथित रूप से वसूली की रकम के प्रबंधन और साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए चारों आरोपियों को जमानत दे दी।

Updated on:
8 Jul 2026, 2:03 PM IST
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