भारत का एक ऐसा शहर जहाँ रहने के लिए धर्म, राजनीति और पैसे की कोई जरूरत नहीं

ऑरोविले एक ऐसा शहर है जहां पूरी दुनिया के पुरुष और महिलाएं शांति से रहते हैं, हर तरह की राष्ट्रीयता से ऊपर, न कोई झगड़ा-झंझट और न कोई छद्दम राजनीति. ऑरोविले मानवीय संवेदना का चरम है

2 min read
Nov 16, 2016
india government, religion, money
india government, religion, money
देश में फ़िलहाल नोटों की मारामारी है जिस वजह से आपकी जेब से पैसे नदारद हैं लेकिन फिर भी आप चैन की सांस लेना चाहते हैं, आप धर्म से ऊपर उठ कर जिंदगी जीना चाहते हैं और चाहते हैं कि राजनीति आपके घर में दखलंदाजी न करें तो चेन्नई से मात्र 150 किलोमीटर दूर विलुप्पुरम जिले में पहुंच जाइए। सूर्योदय के शहर के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर ऑरोविले को आज कौन नहीं जानता। ऑरोविले एक ऐसा शहर है जहां पूरी दुनिया के पुरुष और महिलाएं शांति से रहते हैं। हर तरह की राष्ट्रीयता से ऊपर। न कोई झगड़ा-झंझट और न कोई छद्दम राजनीति। ऑरोविले मानवीय संवेदना का चरम है।

Image result for ऑरोविलेआज हम आपको भारत के इसी शहर के बारे में बताने जा रहे हैं। आपको बता दें कि इस शहर की स्थापना 1968 में मीरा अल्फाजों ने की थी। इस जगह को सिटी ऑफ डॉन भी कहा जाता है यानी सूर्योदय का शहर। आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि इस शहर को बसाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था कि यहां पर लोग जाति-धर्म, ऊंच-नीच और भेदभाव से दूर रहें। यहां कोई भी इंसान आकर रह सकता है लेकिन शर्त सिर्फ इतनी हैं कि उसे एक सेवक के तौर पर रहना होगा। यह एक तरीके की प्रयोगिक टाउनशिप है जो कि तमिलनाडु में स्थित है।

Image result for ऑरोविलेकौन थीं मीरा अल्फाजों

आपको बता दें कि मीरा अल्फाज़ों श्री अरविंदो स्प्रिचुअल रिट्रीट में 29 मार्च 1914 को पॉन्डिचेरी आई थीं और प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वह कुछ समय के लिए जापान चली गई थीं। लेकिन 1920 में वह वापस से पोंडीचेरी आई और 1924 मैं श्री अरविंदो स्प्रिचुअल संस्थान से जुड़ गईं। 1968 आते आते उन्होंने ऑरोविले की स्थापना कर दी जिसे यूनिवर्सल सिटी का नाम दिया गया जहाँ कोई भी कहीं से भी आकर रह सकता है। 2015 तक इस शहर का आकर बढ़ता चला गया और इसे कई जगह सराहा भी जा रहा है।

Image result for ऑरोविले
आप इस शहर में करीबन 50 देशों के लोग रहते हैं। इस शहर की आबादी करीब 24000 है। यहां एक मंदिर भी है। हालांकि मंदिर में किसी धर्म से जुड़े भगवान की पूजा नहीं होती यहां सिर्फ लोग आते हैं और योगा करते हैं। इस शहर की यूनेस्को ने भी प्रशंसा की है और आपको यह बात शायद नहीं पता होगी कि यह शहर भारतीय सरकार के द्वारा भी समर्थित है।
Published on:
16 Nov 2016 04:29 pm