CM Rekha Gupta: दिल्ली में एक ओर सीएम रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार में सबकुछ ठीक नहीं होने की बात कही है।
CM Rekha Gupta: दिल्ली में एक बार फिर सियासी पारा सातवें आसमान पर चढ़ता दिखाई दे रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी आम आदमी पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। बुधवार को जहां दिल्ली में विपक्ष की कमान संभाले आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर मंत्री और विधायकों के साथ समन्वय में कमी का आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर जमकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाकर जांच कराने की बात कही है। इससे दिल्ली की सियासत में फिर उबाल आने की संभावना बढ़ गई है।
बुधवार को सीएम रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी पर जमकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा “साल 2020-21 में AAP सरकार द्वारा चलाई जा रही “जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। इस योजना का बजट सिर्फ 15 करोड़ रुपये था, लेकिन AAP सरकार ने 142 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी बिलों वाली फाइलों को आगे बढ़ा दिया। आम आदमी पार्टी ने दलितों के नाम पर सत्ता हथिया कर दलित बच्चों के भविष्य को लूटा है। इन्होंने बाबासाहेब के आदर्शों का अपमान किया है और शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को भी अपनी भ्रष्ट नीतियों से गंदा किया है।”
सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा "जिन दलित बच्चों को कोचिंग मिलनी थी उनके नाम पर बिना दस्तावेज़ के दावे, बिना हस्ताक्षर के आवेदन और कई संस्थानों के तो 100% दावे ही फर्जी पाए गए। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) अब इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच करेगी। बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी होगा। बाबा साहब के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाली आम आदमी पार्टी को पाई-पाई का हिसाब देना होगा। AAP की राजनीति हमेशा दलितों के नाम पर दिखावा करती रही है लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने की बारी आई तो उन्हीं के हक़ पर डाका डालने से भी नहीं चूकी। अब इनका असली चेहरा जनता के सामने आएगा।”
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने सीएम रेखा गुप्ता पर मंत्री और विधायकों से समन्वय स्थापित करने में फेल होने का आरोप लगाया है। बुधवार को आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा “दिल्ली सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने आदेश निकालकर कहा है कि अब से किसी मंत्री या MLA को भी किसी मीटिंग में DM, ADM व SDM को बुलाना है तो इसकी अनुमति मुख्य सचिव से लेनी होगी। इस सरकार के अंदर आखिर चल क्या रहा है? मुख्यमंत्री को क्या ऐसा लगता है कि मंत्री किसी अधिकारी को फालतू में बुलाता है क्या? यह आदेश बता रहा है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच कुछ गड़बड़ है।”