
Bhupesh Baghel BRICS: कांग्रेस नेता और AICC महासचिव भूपेश बघेल ने BRICS की नई दिल्ली घोषणा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घोषणा में भारत से जुड़े कई अहम मुद्दों का उल्लेख नहीं किया गया है। बघेल ने खास तौर पर गलवान झड़प, अरुणाचल प्रदेश और चीन के क्षेत्र को लेकर किए जा रहे दावों का जिक्र किया।
पहलगाम आतंकी हमले की BRICS घोषणा में निंदा किए जाने को लेकर ANI से बातचीत में बघेल ने कहा कि यह कदम देर से उठाया गया और घोषणा में भारत के कुछ अहम मुद्दों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि केवल पहलगाम हमले की निंदा करना पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब ऑपरेशन सिंदूर को सही नहीं ठहराया गया। बघेल ने कहा कि 'बात यह है कि उन्होंने पहलगाम हमले का विरोध किया, हालांकि काफी समय बीत जाने के बाद, लेकिन उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' को सही नहीं माना, इसलिए यह अधूरा है।'
कांग्रेस नेता ने BRICS घोषणा में गलवान झड़प और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावों का जिक्र नहीं होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से विवाद और तनाव रहा है, लेकिन घोषणा में इनका कोई उल्लेख नहीं किया गया। बघेल ने कहा, गलवान या अरुणाचल के बारे में कुछ नहीं कहा गया, खासकर चीन जो इनके संबंध में दावे कर रहा है, उसे लेकर।
भूपेश बघेल की यह टिप्पणी 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाए जाने के बाद आई है। घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई है। 22 अप्रैल 2025 को आतंकवादियों ने पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए थे। इसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। BRICS घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया गया है। इसमें आतंकवादी गतिविधियों को आपराधिक और किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराए जाने वाला बताया गया है।
घोषणा में आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को खारिज करने की अपील की गई है। इसके अलावा आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंक के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात कही गई है।
इससे पहले कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी BRICS की नई दिल्ली घोषणा के कूटनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि घोषणा में पहलघाम हमले की निंदा तो की गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हमला किसने कराया या इसके पीछे कौन था। अल्वी ने कहा था कि केवल आतंकवाद की निंदा करना पर्याप्त नहीं है और घोषणा में आतंकवाद के जिम्मेदार लोगों या प्रायोजक देशों का नाम नहीं लिया गया है। उन्होंने इसी आधार पर इसे भारत के लिए कूटनीतिक जीत मानने पर सवाल उठाया।
वहीं, BRICS की नई दिल्ली घोषणा को भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि पहली बार समूह ने पहलघाम आतंकी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रुख अपनाया है। घोषणा में आतंकवाद के साथ-साथ आतंकवाद के वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर धोखाधड़ी और सीमा पार चलने वाले ठगी नेटवर्क के जरिए चरमपंथी गतिविधियों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर भी चिंता जताई गई है।
BRICS के इस रुख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि चीन ने भी घोषणा पर सहमति जताई है, हालांकि इसमें पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है।