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सोनम वांगचुक ने मांगी 5 दिन की मदद, ‘कॉकरोचों’ का मिला आधा-अधूरा जवाब; लद्दाख पदयात्रा पर सस्पेंस बरकरार

CJP support Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने लद्दाख में 19-24 सितंबर तक होने वाली पदयात्रा के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से 5 दिन का साथ मांगा है। CJP संयोजक अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने 'सपोर्ट लद्दाख' लिखकर केवल सोशल मीडिया पर समर्थन दिया है, जिससे उनके लद्दाख जाने पर सस्पेंस बना हुआ है।
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CJP support Sonam Wangchuk

सोनम वांगचुक ने मांगी 5 दिन की मदद, फोटो सोर्स- ANI

Sonam Wangchuk Ladakh Padyatra: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर आंदोलन को ऐतिहासिक सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मदद की गुहार पर CJP नेतृत्व का रुख अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। 26 दिनों तक छात्रों के साथ अनशन पर बैठने वाले वांगचुक ने लद्दाख आंदोलन के लिए CJP से 5 दिनों के साथ की मांग की थी, लेकिन CJP संयोजक अभिजीत दीपके और उनकी टीम की ओर से इसे लेकर कोई सीधा जवाब नहीं आया है।

सोनम वांगचुक की अपील

सोनम वांगचुक लद्दाख में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली, विधानसभा के गठन और एलजी प्रशासन को नीतिगत फैसलों से रोकने जैसी मांगों को लेकर 19 से 24 सितंबर तक एक विशाल पदयात्रा निकालने जा रहे हैं। शुक्रवार शाम जारी एक भावुक वीडियो संदेश में वांगचुक ने जंतर-मंतर आंदोलन के दिनों को याद दिलाते हुए 'कॉकरोचों' (CJP समर्थकों) से लद्दाख पहुंचने की अपील की। उन्होंने वीडियो में समर्थकों से 'हां, मैं आ रहा हूं' लिखकर अपनी सहमति देने का आग्रह किया था।

अभिजीत दीपके और सौरभ दास का ‘आधा-अधूरा’ समर्थन

वीडियो अपलोड होने के करीब 13 घंटे बाद CJP के मुख्य संयोजक अभिजीत दीपके ने इसे रीपोस्ट करते हुए केवल 'सपोर्ट लद्दाख' लिखा। वहीं, सह-संयोजक सौरभ दास ने लिखा कि 'हमें लद्दाख के साथ खड़ा होना चाहिए। लद्दाख को बचाएं।' हालांकि, इन संक्षिप्त पोस्ट से यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या CJP की कोर टीम (अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका) खुद लद्दाख जाकर 5 दिनों की पदयात्रा में कदम से कदम मिलाएगी या यह समर्थन केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा।

झारखंड आंदोलन का उदाहरण

जानकारों का कहना है कि इससे पहले भी झारखंड में हुए छात्र आंदोलन के दौरान CJP ने सोशल मीडिया पर पुरजोर समर्थन का दावा किया था, लेकिन कोर लीडरशिप के बजाय सिर्फ एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर औपचारिकता पूरी की गई थी।

19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा, कई सवाल अब भी कायम

सोनम वांगचुक की 19 से 24 सितंबर तक चलने वाली यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। वांगचुक के अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक आश्वासन देती है तो यह यात्रा 'लद्दाख के शहीदों' की स्मृति में निकाली जाएगी, अन्यथा यह एक बड़ा विरोध मार्च (Protest March) होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या CJP का शीर्ष नेतृत्व सोनम वांगचुक के साथ जमीन पर उतरेगा या फिर इस बार भी लद्दाख आंदोलन को सिर्फ डिजिटल और नैतिक समर्थन ही नसीब होगा? CJP की ओर से विस्तृत बयान आना अभी बाकी है।