
BRICS की नई दिल्ली घोषणा को मायावती ने बताया 'कूटनीतिक उपलब्धि', फोटो सोर्स- ANI
Mayawati BRICS Summit: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के नतीजों की सराहना की है। उन्होंने सर्वसम्मति से अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा 2026 को सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। मायावती ने कहा कि BRICS देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा उम्मीद जगाती है।
लखनऊ में रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा कि 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में 140 पैराग्राफ वाली दिल्ली घोषणा का सर्वसम्मति से जारी होना सदस्य देशों के बीच बेहतर आपसी समझ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करना सकारात्मक कदम है। मायावती ने कहा कि इस प्रक्रिया में BRICS मुद्रा विकसित करना भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए रुख का भी समर्थन किया।
मायावती ने कहा कि पहलगाम हमले के संदर्भ में भारत के दृष्टिकोण को उचित समर्थन मिला है। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता को सराहनीय बताया। BRICS की नई दिल्ली घोषणा में अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया गया है। मायावती ने कहा कि आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने को लेकर BRICS देशों की प्रतिबद्धता सराहनीय है।
BSP प्रमुख ने भारत और चीन के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पड़ोसी देश के साथ मतभेदों को विवाद में न बदलने और दोनों देशों को 'विकास साझेदार' के रूप में देखने का दृष्टिकोण कितनी जल्दी सकारात्मक परिणाम देता है। मायावती की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। 2019 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
BRICS शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में प्रतिबद्धता जताई। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखा जाना चाहिए। दोनों देशों के नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और दोनों पक्षों को आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए जरूरी आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और व्यवस्थाओं का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक नजरिए से देखना चाहिए और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखना चाहिए।
Updated on:
13 Sept 2026 01:52 pm
Published on:
13 Sept 2026 01:52 pm
