भारतीय जनता पार्टी ने अभेद्य माने जा रहे पश्चिम बंगाल में कमल खिला कर अपने अंग-बंग-कलिंग में भगवा लहराने के अपने मिशन को पूरा कर दिया है। भाजपा की इस सफलता के पीछे प्रत्येक बूथ के अनुसार बनाई गई नीति और हर विधानसभा के समीकरण को साधने के लिए सावधानी से बुनी गई रणनीति रही। पिछले साल दुर्गापूजा से ही भाजपा ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दीं। सोसायटियों में प्रतियोगिताओं के आयोजन से जोड़ा। भाजपा ने हिन्दू वोटों को लक्ष्य बना कर प्रदेश की 70 प्रतिशत हिंदू आबादी पर पैठ बनाई। भाजपा नेताओं ने अपने अभियान के दौरान खुल कर घुसपैठ के मुद्दे को उठाया। वहीं एसआईआर में 91 लाख वोट कटने के बाद कई विधानसभाओं का गणित बदल गया।
अभिषेक सिंघल
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने अभेद्य माने जा रहे पश्चिम बंगाल में कमल खिला कर अपने अंग-बंग-कलिंग में भगवा लहराने के अपने मिशन को पूरा कर दिया है। भाजपा की इस सफलता के पीछे प्रत्येक बूथ के अनुसार बनाई गई नीति और हर विधानसभा के समीकरण को साधने के लिए सावधानी से बुनी गई रणनीति रही।
पिछले साल दुर्गापूजा से ही भाजपा ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दीं। सोसायटियों में प्रतियोगिताओं के आयोजन से जोड़ा। भाजपा ने हिन्दू वोटों को लक्ष्य बना कर प्रदेश की 70 प्रतिशत हिंदू आबादी पर पैठ बनाई। भाजपा नेताओं ने अपने अभियान के दौरान खुल कर घुसपैठ के मुद्दे को उठाया। वहीं एसआईआर में 91 लाख वोट कटने के बाद कई विधानसभाओं का गणित बदल गया।
भाषणों में पार्टी ने पूरी तरीके से आक्रामक होने से परहेज किया और भय और हिंसा और भ्रष्टाचार और कट मनी विरुद्ध चुनाव का मुद्दा बनाते हुए चुनाव को स्थानीय मुद्दों तक सीमित रखा और ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमले की बजाय अभिषेक बनर्जी के भतीजा राज को मुद्दा बनाया। घुसपैठ, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी को मुद्दा बना कर तृणमूल कांग्रेस को घेरा। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भाषणों में जहां एक और भय और हिंसा के खात्मे को केन्द्र में रखा वहीं बंगाली अस्मिता को बल देने वाली बात कही। वहीं सातवें वेतन आयोग को लागू करने का मुद्दा कर्मचारियों के बीच खासा महत्व का रहा।
चुनाव के दौरान मछली भात के भोजन को भाजपा ने प्रमुखता से आगे रखा। चुनाव के दौरान भाजपा को लगा कि उनके खिलाफ बंगाल में मांसाहारी भोजन बंद होने और मछली पर रोक की अफवाह उड़ाई जा रही है तो भाजपा के प्रमुख नेताओं ने मछली भोज के फोटो शेयर किए। कार्यकर्ताओं के साथ मछली भोज किया। मोदी ने झारग्राम में झालमुड़ी से भी यह संदेश दिया।
भाजपा ने इस बार बाहरी के मुद्दे को पूरी तरह से मिटाने के लिए बंगाली पृष्ठभूमि से जुड़े नेताओं का आगे किया। स्थानीय नेताओं में सुवेन्दु अधिकारी, सौमिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष को आगे किया तो स्मृति ईरानी ने बांग्ला में अपने भाषणों से हिन्दी भाषी पार्टी की छवि को तोड़ा। वहीं पार्टी के महासचिव और बंगाल के प्रभारी सुनील बंसल को लेकर ममता बनर्जी ने जब बाहरी होने का आरोप लगाया तो उनके बंगाल कनेक्शन ने बाहरी के नैरेटिव को तोड़ कर भाजपा के पक्ष में कर दिया।
पिछले चुनाव में बड़े पैमाने पर टीएमसी में तोड़फोड़ की थी। इस हाई प्रोफाइल चेहरों के लिए पहचाने जाने वाले पश्चिम बंगाल के चुनाव में पार्टी ने कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी बनाया। आरजीकर पीड़िता की माता को प्रत्याशी बना कर महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी आगे बढ़ाया।
पश्चिम बंगाल में महिला मतदाता पिछले तीन चुनावों में पुरुषों से ज्यादा मतदान करती आई हैं। कई विधानसभा क्षेत्रों में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव के बीच महिला आरक्षण पर विशेष सत्र भी आहूत किया गया। साथ ही महिलाओं के लिए विशेष योजना का भी ऐलान किया गया।
पार्टी ने बूथ नेटवर्क पर 80 हजार से ज्यादा बूथों में से 66 हजार बूथों पर पार्टी ने अपना मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है। पार्टी ने एक एक सीट पर गहन विश्लेषण कर 210 सीटों को ए श्रेणी में रख उन पर विशेष प्रयास किए और 39 सीटों को बी श्रेणी में रखा था। चुनाव अभियान के दौरान पार्टी ने 1.65 लाख जमीनी बैठके, 12,000 स्ट्रीट कॉर्नर मीटिंग कीं। 21 राज्यों से आए 9500 प्रवासी बंगालीभाषी कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर कमान संभाली। चार्जशीट पॉलिटिक्स के लिए 80 से ज्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पांच क्षेत्रों से निकाली गई परिवर्तन यात्रा।
हुगली, कोलकाता, हावड़ा, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जो भाजपा के लिए पहेली बना हुआ था। कोलकाता प्रेसीडेंसी के इस क्षेत्र में 109 सीटों में से 2021 में टीएमसी ने 98 सीटें जीती थीं। कोलकाता प्रेसीडेंसी के लिए 142 वार्ड में हर वार्ड में 5 समर्पित पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई। इन पदाधिकारियों की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए और हाई-राइज बिल्डिंग्स में रहने वाले परिवारों रिश्ता बनाना था। भाजपा ने इस क्षेत्र में 60 सीटों पर जीत की ओर कदम बढ़ाए।
युवाओं को जोड़ने के लिए नरेंद्र कप फुटबॉल टूर्नामेंट किया। इसमें 1123 टीमों और 18 हजार से अधिक खिलाड़ी जुड़े। 1 लाख जर्सी और टी-शर्ट बांटी गईं और 80 हजार फुटबॉल गांव-गांव पहुंचाए गए। 253 महिला फुटबॉल टीमों ने भी हिस्सा लिया। क्रिकेट के मैदान पर भी 5000 बैट-बॉल बांटे गए। मोहल्ला कैरम क्लबों और फुटबॉल क्लबों को जोड़ा गया।
बंगाल के इस महा-अभियान की रूपरेखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों में तैयार की गई। अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशन में जमीन पर कमान भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल ने संभाली। उनके साथ विप्लव देव, अमित मालवीय और मंगल पांडेय और कैलाश चौधरी की टीम ने काम किया।
भाजपा को 2011 के विधानसभा चुनाव में महज 4 प्रतिशत वोट मिले थे। 2016 में 10.17 प्रतिशत वोट और 2019 के लोकसभा चुनाव में 40.25 प्रतिशत वोट मिले। 2021 के विधानसभा चुनाव में 38 प्रतिशत के करीब वोट तो 2024 के लोकसभा चुनाव में 39 प्रतिशत के करीब वोट मिले। पार्टी को इस चुनाव में 45.84 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी को जिस छह प्रतिशत स्विंग की तलाश थी वह पूरी हुई।