
BRS Women MLAs: तेलंगाना विधानसभा के बाहर महिला विधायकों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी के मामले में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में BRS की महिला विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
BRS MLC सुरभि वाणी देवी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों ने महिला विधायकों को धक्का दिया और उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने महिला विधायकों के बाल और साड़ियां खींचीं। वाणी देवी ने कहा कि महिला विधायकों को विधानसभा परिसर में जाने से रोका गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विधायक सामान्य कपड़ों और साड़ियों में थीं तो उन्हें अंदर जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
BRS नेता ने कहा कि पार्टी के विधायकों को विधानसभा में अपनी शिकायतें रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। इसी वजह से प्रतिनिधिमंडल ने NCW के सामने अपनी शिकायत रखी और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि जब सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला तो अपनी शिकायत आयोग के सामने रखना जरूरी था।
BRS ने इससे पहले पार्टी विधायक और पूर्व मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी का आरोप लगाया था। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा कर दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें बाल पकड़कर घसीटा। यह विवाद उस समय सामने आया जब BRS ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के 1,000 दिन पूरे होने के खिलाफ विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव, पूर्व मंत्री टी हरीश राव और अन्य नेताओं को विधानसभा परिसर में प्रवेश से रोके जाने के बाद हिरासत में लिया गया था।
मामले को लेकर कांग्रेस विधायक अडांकी दयाकर ने भी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए IPS अधिकारी विजय कुमार को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। दयाकर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी पूरे मामले की जांच करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को सामने लाया जाना चाहिए।
BRS लगातार कांग्रेस सरकार पर चुनावी गारंटियों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि सरकार के 1,000 दिन पूरे होने के बावजूद कई चुनावी वादे अब तक लागू नहीं किए गए हैं।