liquor scam: दिल्ली शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
liquor scam: दिल्ली शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। एजेंसी का कहना है कि निचली अदालत के फैसले के कुछ हिस्से तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह फैसला आपराधिक कानून की तय प्रक्रिया के खिलाफ लगता है। वहीं सीबीआई की तरफ से यह भी कहा गया कि इस मामले में सबूत मिटाने के कई उदाहरण रिकॉर्ड पर पेश किए गए हैं। एजेंसी का आरोप है कि करीब 170 मोबाइल फोन नष्ट किए गए, जिसका भी उल्लेख अदालत के समक्ष किया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में गवाहों के बयानों की पूरी तरह पुष्टि मुकदमे की प्रारंभिक अवस्था में करना आवश्यक नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां पहले गवाहों के बयान दर्ज करती हैं और इन्हें केस के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाता है। इसके बाद जब मुकदमे की विधिवत सुनवाई शुरू होती है, तब गवाहों को अदालत में पेश किया जाता है। उस दौरान बचाव पक्ष को गवाहों से जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) करने का पूरा अवसर मिलता है, जिससे उनके बयानों की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच की जाती है। मेहता ने कहा कि यही न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य और स्थापित तरीका है, इसलिए शुरुआती चरण में ही गवाहों के बयानों को अंतिम रूप से परखना आवश्यक नहीं माना जाता।
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में आज दिल्ली आबकारी नीति मामले को लेकर सुनवाई हुई। यह सुनवाई सीबीआई की उस याचिका पर हुई, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति Swarna Kanta Sharma ने सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है।