
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पशुधन व पशुधन उत्पाद (आयात-निर्यात) विधेयक-2023 का मसौदा वापस लेने का ऐलान किया है। विधेयक में जिंदा पशुओं को भी 'कमोडिटी' मानते हुए इनके आयात-निर्यात के प्रावधान किए गए थे।
मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने गत 7 जून को विधेयक का चार पृष्ठीय मसौदा जारी किया था। इस पर दस दिन में लोगों से सुझाव मांगे गए थे, लेकिन इसके सामने आते ही देशभर में पशु प्रेमी व जैन समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ऐसे में सरकार को विधेयक का मसौदा वापस लेना पड़ा। आशंका जताई जा रही थी कि विधेयक पारित हो गया तो जिंदा पशुओं का निर्यात करने के रास्ते भी खुल जाएंगे।
जानकार सूत्रों के अनुसार सामान्यतः ऐसे किसी विधेयक पर आम लोगों से सुझाव आदि के लिए लगभग दो महीने का समय दिया जाता है, लेकिन इस मसौदे पर सरकार ने मात्र दस दिन का वक्त ही दिया। इसे भी विधेयक वापस लेने का कारण माना जा रहा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव जीएन सिंह ने मसौदा वापस लेने का आदेश जारी कर कहा है कि पशु कल्याण के प्रति संवेदनशील और भावनाओं के मामले देखते हुए विधेयक के मसौदे पर लोगों की राय लेने के लिए और ज्यादा समय की जरूरत है। इसके चलते मसौदा वापस लिया जा रहा है।
इसलिए आ रहा था विधेयक
पशुधन के आयात को विनियमित करने के लिए अंग्रेजों के जमाने में पशुधन आयात अधिनियम-1898 में लाया गया था। इसके बाद साल 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए पशुधन आयात (संशोधन) अध्यादेश जारी किया और बाद में इसे कानून का दर्जा मिला। मोदी सरकार मौजूदा जरूरतों को देखते हुए कानून को अपग्रेड करने के उद्देश्य से नया विधेयक ला रही थी।
देशभर में हुआ विरोध
विधेयक के मसौदे का देशभर में विरोध किया गया। पशु प्रेमी संगठनों के मुताबिक कुत्ता-बिल्ली, घोड़े-खच्चर के अलावा गोवंशीय जानवर भी इसके दायरे में आने से इनको जिंदा निर्यात करने का रास्ता खुल जाता और दुनियाभर में पशुओं पर क्रूरता बढ़ जाती।