
Abhijeet Dipke: सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केरल के कोच्चि में शनिवार को होने वाले SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि जब तक हम नहीं कहते कि यह खत्म हो गया, तब तक यह खत्म नहीं हुआ है।
दीपके ने पोस्ट के साथ एक तस्वीर साझा की, जिस पर लिखा था कि शाम 4 बजे कोच्चि में मिलते हैं।” इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'Gyanu must go!' यानी उनका इशारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की ओर था।
इससे पहले गुरुवार को CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए लिखा था, “लोकतंत्र बचाओ! SIR रद्द करो! हमारे साथ जुड़ें 7 नवंबर, शाम 4 बजे, राजेंद्र मैदान, कोच्चि। ‘Jantar Mantar at Kochi’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में केरल के अलग-अलग हिस्सों से खासकर युवाओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है। CJP के कोच्चि के सदस्यों ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि प्रदर्शन में अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, CJP की राष्ट्रीय नेता अफरीन नवाज और दक्षिण भारत के प्रभारी विजय रेड्डी मल्लांगी भी शामिल होंगे।
कोच्चि में होने वाला यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है, जब CJP के साथ विपक्षी दल भी मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पिछले महीने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद यह मुद्दा और गरमा गया था। CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे ऐसे जंतर-मंतर में प्रवेश कर गए थे, जिसे प्रदर्शन स्थल के तौर पर अधिसूचित नहीं किया गया था। वहीं, INDIA ब्लॉक ने भी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर बड़ा प्रदर्शन किया था।
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े उन फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज की, जिन्हें उनके अनुसार उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची के SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए थे। आयोग ने इस दावे को भी खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन मामलों में अकेले निर्णय लिया।