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दिल्ली के प्रदूषण पर AISA अध्यक्ष ने सरकार को घेरा, बोलीं- ‘अच्छी हवा के आंकड़े दिखाकर डेटा से छेड़छाड़’

AISA President: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने सरकार के ‘220 दिन अच्छी हवा’ और अक्टूबर को दशक का सबसे साफ महीना बताए जाने के दावों पर सवाल उठाए।
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नई दिल्ली

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Imran Ansari

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Updated: 6 Nov 2026, 6:51 PM IST

AISA President

दिल्ली के प्रदूषण पर AISA अध्यक्ष ने सरकार को घेरा

Delhi Air Pollution: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने सरकार के प्रदूषण से जुड़े दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से दिल्ली में इस साल 220 दिन अच्छी हवा रहने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जब इन आंकड़ों की जांच की जाती है तो तस्वीर अलग नजर आती है।

नेहा बोरा ने कहा कि सरकार जिन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली में अच्छी वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या बता रही है, उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, जो वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखते।

‘अक्टूबर को सबसे साफ महीना बताने से पहले बारिश का जिक्र क्यों नहीं?’

AISA अध्यक्ष ने अक्टूबर महीने को लेकर किए जा रहे दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार इस साल अक्टूबर को पिछले एक दशक का सबसे साफ महीना बता रही है, लेकिन इस दौरान हुई भारी बारिश का जिक्र नहीं किया जा रहा। नेहा बोरा के मुताबिक, अक्टूबर में हुई बारिश के कारण हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व और पार्टिकुलेट मैटर नीचे बैठ गए, जिससे कुछ समय के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार दिखाई दिया। उनका कहना था कि बारिश के दौरान हवा साफ होने को केवल सरकारी नीतियों या प्रदूषण नियंत्रण के परिणाम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही बारिश का दौर खत्म हुआ, दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति फिर पहले जैसी नजर आने लगी। उनके मुताबिक, इससे यह सवाल उठता है कि हवा की गुणवत्ता में सुधार का वास्तविक कारण क्या था और सरकारी दावों में मौसम की भूमिका को किस तरह शामिल किया गया है।

नेहा बोरा ने कहा कि जब बारिश के बाद प्रदूषण दोबारा बढ़ा और स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया, तब दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदूषण के आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने और वास्तविक स्थिति के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करने की मांग की।