दरअसल, इरफान अंसारी के बयान को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद चल रहा है। अब रामदास आठवले की इस प्रतिक्रिया ने बहस को और तेज कर दिया है। आठवले ने अपने बयान में एक तरफ लोकतांत्रिक आंदोलनों के अधिकार को स्वीकार किया, तो दूसरी तरफ संविधान के खिलाफ जाने वाली बातों पर कड़ा एतराज जताया है। उनकी प्रतिक्रिया के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ने के आसार हैं।