जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर सिद्दीकी की ओर से पेश किए गए मेडिकल दस्तावेजों की जांच करने और 6 नवंबर को अपना जवाब देने का निर्देश दिया था। हालांकि, ED ने अंतरिम जमानत का विरोध किया था। एजेंसी की दलील थी कि रिहा होने पर सिद्दीकी के फरार होने की आशंका है। कस्टडी पैरोल में किसी कैदी को पुलिसकर्मियों की निगरानी में तय जगह पर जाने की अनुमति दी जाती है। इस दौरान वह पूरी तरह पुलिस की निगरानी में रहता है। इससे पहले जुलाई में भी सिद्दीकी ने अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, उस समय अदालत ने उन्हें तीन तय तारीखों पर कस्टडी पैरोल के जरिए पत्नी से मिलने की अनुमति दी थी।