-उत्तर प्रदेश में जिलाध्यक्षों के 65 फीसदी पद एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और महिलाओं को -अन्य राज्यों में भी इसी तर्ज पर बदलाव की तैयारी
शादाब अहमद
नई दिल्ली। कांग्रेस ने सामाजिक न्याय की रणनीति पर चलते हुए जिसकी जितनी आबादी, उसको उतना हक का नारा बुलंद किया था। अब यह नारा संगठन में अमल होता दिख रहा हैै। इसकी शुरुआत संगठन के लिहाज से कमजोर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश से की है। जहां एक साथ जिला, शहर अध्यक्षों को बदला गया। करीब 65 फीसदी पद दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों व महिलाओं को दिए हैं। अब इसी तर्ज पर अन्य राज्यों में भी बदलाव की कवायद चल रही है।
दरअसल, कांग्रेस ने पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश संगठन में कांग्रेस संगठन सृजन कार्यक्रम चलाकर इसको अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनाने की पहल की थी। 2027 के विधानसभा चुनाव में कांंग्रेस अपने कोर वोटर्स दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को वापसी के लिए काम कर रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामाजिक न्याय और जाति जगणना के नारे को धार देने के लिए पार्टी अपने संगठन में इसको अमल में ला रही है। यहां 131 जिला व शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के नामों की घोषणा की गई। इस सूची में 8 महिलाएं यानी 6.11 फीसदी शामिल है।
उत्तर प्रदेश प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने बताया कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के मार्गदर्शन में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। राहुल गांधी एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को मुख्य धारा में जोडऩे की बात करते हैं। यही वजह एै कि संगठनात्मक बदलाव से नेतृत्व वाले पदों पर दलित और पिछड़े वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित होगी। हमारी इस रणनीति का असर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा में भी देखने को मिलेगा।
| वर्ग | पद संख्या | प्रतिशत |
| सामान्य वर्ग | 46 | 35.11 |
| ओबीसी | 48 | 36.64 |
(ओबीसी मुस्लिम भी शामिल)
| मुस्लिम | 32 | 24.41 |
| अनुसूचित जाति | 19 | 14.50 |
| अनुसूचित जनजाति | 1 | 0.76 |