नई दिल्ली

भारत बंदः कहीं 2019 की तैयारी, दलितों पर तो नहीं पड़ रही भारी!

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में राजनीति गरमा गई है। अब सवाल यह उठने लगा है कि कहीं यह 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी तो नहीं.

4 min read
Mission 2019 Lok Sabha Polls

नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में महज आठ दिनों के अंदर अलग-अलग संगठनों की ओर से दो बार भारत बंद बुलाया गया है। बीते 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था। वहीं, 10 अप्रैल यानी मंगलवार को सवर्णों ने भारत बंद का आह्वान किया। इस बंद ने पूरे देश में बवाल मचा दिया। इतना ही नहीं इस बंद में कहीं प्रत्यक्ष तो कहीं अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक पार्टियों की ओर से भी भागीदारी निभाई जा रही है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस भारत बंद के पीछे का मकसद क्या हो सकता है?

क्या दलित हित को लेकर भारत बंद बुलाया जा रहा है या फिर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में दलित वोटों का ध्रुवीकरण करने की तैयारी है? दरअसल, बीते कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर को लेकर जबरदस्त राजनीति हो रही है। सभी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर पर अपनी राजनीति की रोटी सेंक रही हैं।

चूंकि, बाबा साहेब को दलितों का मसीहा माना जाता है, इसलिए इनके नाम की चर्चा होते ही सबके मन में एक ही बात आती है कि कहीं राजनीतिक पार्टियां दलित वोट को लेकर इस पर राजनीति तो नहीं कर रही हैं। इतना ही नहीं समय-समय पर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने आप को दलितों का मसीहा बताने से भी नहीं चूकती हैं।

सरकार से लेकर विपक्षी पार्टियों तक खुद को बताती हैं दलित हितैषी

सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों पर कहा था कि इस एक्ट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। कोर्ट ने अनुसूचित जाति एंव जनजाति अत्याचार रोकथाम के अधिनियम, 1989 के तहत स्वत: गिरफ्तारी और आपराधिक मामला दर्ज किए जाने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने इस एक्ट को लेकर एक नई गाइडलाइन भी जारी की। कोर्ट के इस आदेश के बाद देशभर के दलित संगठन उग्र हो गए और सड़क पर उतरने का फैसला किया।

इसी बीच कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने रिव्यू पिटीशन दायर की थी। लेकिन, विपक्षी पार्टियों का कहना था कि भाजपा दलितों को निशाना बना रही है और केंद्र पर इस एक्ट के नियमों को कड़ा बनाने के लिए दबाव बना रही है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा दलित वोट बैंक की राजनीति कर रही है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि देशभर में दलितों का काफी बड़ा वोट बैंक है, इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियां इसे अपने साथ लेकर चलना चाहती हैं। वहीं, जब 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया गया था तो स्थानीय राजनीतिक पार्टियों से लेकर केंद्रीय राजनीतिक पार्टियां भी इसमें हिस्सा लेने से नहीं चूकीं। भाजपा का कहना है कि वो दलित हितैषी है तो विपक्षी पार्टियों का कहना है कि दलितों के असली हितैषी वो हैं, जबकि भाजपा दलितों को निशाना बना रही है।

वैसे भी 2019 लोकसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि सभी राजनीतिक पार्टियां अपने वोट बैंक को साधने की तैयारी करने में जुट गई हैं। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद से दलितों पर राजनीति गरमानी शुरू हो गई है। इस मौके को सभी पार्टियां अपने पक्ष में भुनाना चाहती हैं। ताकि समय आने पर दलित वोट उनके पक्ष में हो।

बंद के बाद मोदी ने कहा था अंबेडकर का असली सम्मान हमने किया

2 अप्रैल को भारत बंद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक भाषण में कहा था कि बाबा साहेब का असली सम्मान हमने किया है। पीएम ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने केवल राजनीति के लिए अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल किया, जबकि हमने बाबा साहेब को असली सम्मान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने बाबा साहब की याद में कई परियोजनाओं को पूरा करके देश में उन्हें उचित स्थान दिलवाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि विपक्षियों ने राजनीतिक लाभ के लिए अंबेडकर के नाम को अपने साथ जोड़ा। लेकिन, हमारी सरकार ने सबसे ज्यादा उनका सम्मान किया। पीएम ने कहा था कि अंबेडकर को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए, बल्कि उनके दिखाए हुए रास्ते पर सबको चलना चाहिए।

योगी सरकार ने कर दिया नाम में परिवर्तन

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम को बदलने का फैसला किया। सरकार का कहना था कि यूपी में अब बाबा साहेब का नाम 'डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर' होगा। जिसपर काफी राजनीति भी हुई थी। विपक्ष ने सरकार पर अंबेडकर को लेकर जमकर हमला बोला था। साथ अंबेडकर के नाम पर एक नई राजनीति करने का आरोप भी लगाया था। दरअसल, बाबा साहेब का नाम आते ही दलित समुदाय का नाम जुड़ जाता है। इसलिए, कोई भी पार्टी इस मुद्दे को भुनाने से नहीं चूकती है।

Published on:
10 Apr 2018 02:11 pm