नई दिल्ली

43 साल की महिला का पेट देखकर दंग रह गए डॉक्टर, एम्स में ऑपरेशन के बाद निकाला 20 किलो का ट्यूमर

Delhi AIIMS: दिल्ली एम्स में इलाज के लिए पहुंची पश्चिम बंगाल निवासी 43 साल की मुनमुन का पेट तेजी से बढ़ रहा था। इसे देख पहली बार तो डॉक्टर भी हैरान रह गए। हालांकि बाद में जांच कराई गई तो पता चला कि महिला कोलन कैंसर से पीड़ित है।
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Delhi AIIMS doctors extraordinary surgery removing 20 kg tumor from woman body battling cancer

Delhi AIIMS: राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) के डॉक्टरों ने असंभव को संभव बनाते हुए एक 43 साल की महिला को नया जीवन दिया है। इस महिला का मुनमुन है, जो पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली है। डॉक्टर बताते हैं कि जब मुनमुन अपने इलाज के लिए एम्स पहुंची थी तो उनका पेट तेजी से बढ़ रहा था, जो किसी टंकी से कम नहीं लग रहा था। शरीर से कई गुना ज्यादा भारी पेट होने से महिला को चलने-फिरने और उठने-बैठने में असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता था। जब डॉक्टरों ने उसकी ये हालत देखी तो वो भी हैरान रह गए, क्योंकि ऐसा मरीज पहले उनके सामने नहीं आया था। इसके बाद महिला की जांच कराई गई तो पता चला कि उसे कोलन कैंसर है।

महिला के पेट से निकला 20 किलो का ट्यूमर

दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि महिला की जांच में जब कोलन कैंसर का पता चला तो उसका इलाज शुरू किया गया। यह इलाज आसान नहीं था। महिला को पहली बार जुलाई 2024 में एम्स लाया गया था। लंबे समय तक दवाएं देने के बाद भी उसके पेट का आकार बढ़ना बंद नहीं हुआ और पेल्विक हिस्से के साथ उसके पूरे पेट में कैंसर जबरदस्त तरीके से फैलने लगा। इसके बाद एम्स में डॉक्टरों के पैनल ने उसका ऑपरेशन करने की तैयारी शुरू की। इसके बाद हाल ही में ऑपरेशन कर महिला के पेट से 19 किलो 900 ग्राम का ट्यूमर निकाला गया।

25 साल पहले हुई थी सर्जरी

महिला ने डॉक्टरों को बताया कि लगभग 25 साल पहले उसके पेट के एक हिस्से की सैल्पिंगो-ऊफोरेक्टॉमी हुई थी। यह एक तरह की सर्जरी होती है, जिसमें एक ओवरी यानी अंडाशय और एक प्रजनन ग्रंथि के साथ एक फैलोपियन ट्यूब को हटाया जाता है। ये दोनों अंग शरीर के एक हिस्से में पाए जाते हैं। इनमें खून की सप्लाई भी एक ही होती है। एम्स के डॉक्टरों को जब ये पता चला तो उन्होंने कैंसर का इलाज शुरू किया। इसके तहत महिला को बेवाकिजुमैब के साथ फोलफोक्स के छह साइकिल दिए गए। बेवाकिजुमैब एक तरह की कैंसर थेरेपी होती है, जो ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए खून की नसों की ग्रोथ रोक देती है, जबकि फोलफोक्स (FOLFOX) कैंसर मरीजों को दी जाने वाली एक तरह की कीमोथेरेपी होती है।

12 जनवरी को साइटोरेडक्टिव सर्जरी सफल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट प्रोफेसर MD रे ने HT को बताया कि महिला को पिछले साल 24 अक्टूबर को बेवाकिजुमैब और फोलफोक्स का आखिरी डोज दिया गया। इसके बाद FOLFIRI का एक साइकिल दिया गया। यह 29 नवंबर 2025 को पूरा हुआ। FOLFIRI एक अन्य तरह का कीमोथेरेपी का कॉम्बिनेशन होता है। इसके बाद PET-CT पर आंशिक मेटाबॉलिक रिस्पॉन्स दिखा। प्रोफेसर रे ने बताया कि PET-CT पर आंशिक मेटाबॉलिक रिस्पॉन्स मिलने के बाद 12 जनवरी 2026 को महिला की साइटोरेडक्टिव सर्जरी की गई, जिसमें उसके पेट से ट्यूमर पूरी तरह अलग कर दिया गया। फिलहाल महिला ICU से वार्ड में शिफ्ट हो चुकी है और उसकी हालत बेहतर है।

13 महीने में दिल्ली एम्स ने 1,000 से अधिक रोबोटिक सर्जरी की

एम्स के डॉक्टरों की मानें तो पिछले 13 महीने में संस्‍थान ने रोबोटिक सर्जरी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग में लगाए गए अत्याधुनिक सर्जिकल रोबोट से मरीजों को बेहतर और सटीक सर्जिकल केयर मिल रही है। इस तकनीक का उपयोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रक्रियाओं, हेपेटोबिलरी सर्जरी, ऑन्कोलॉजिकल रिसेक्शन और ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी में किया जा रहा है। इसके साथ ही 13 महीनों के भीतर विभाग ने 1,000 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी कर चुका है। इनमें पैंक्रियाटिक ड्यूओडेनेक्टॉमी, गैस्ट्रेक्टॉमी, एसोफेगेक्टॉमी, कोलेसिस्टेक्टॉमी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के लिए एंटीरियर रिसेक्शन, हर्निया से जुड़े जटिल एब्डोमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन, किडनी ट्रांसप्लांटेशन और एंडोक्राइन ट्यूमर के इलाज के लिए थायरॉयड, पैराथायरॉयड, एड्रेनल व पैंक्रियाज की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी शामिल हैं।

Updated on:
23 Jan 2026 07:04 pm
Published on:
23 Jan 2026 06:57 pm