नई दिल्ली

घूस लेते पकड़े गए अधिकारी तो बना नया नियम! अब फरियादियों को बिना मोबाइल जाना होगा MCD ऑफिस

MCD Corruption Case: दिल्ली एमसीडी के शाहदरा उत्तरी जोन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नया नियम लागू किया गया है। अब उपायुक्त से मिलने वाले फरियादियों को मोबाइल बाहर जमा करना होगा। पूर्व मेयर ने इसे तानाशाही बताते हुए सवाल उठाए हैं।
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MCD Corruption Case
फरियादियों को बिना मोबाइल जाना होगा MCD ऑफिस

MCD Mobile Ban Rule: भ्रष्टाचार के आरोपों और सीबीआई की कार्रवाई से चर्चा में आए एमसीडी (मुंसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली) के शाहदरा उत्तरी जोन में एक अजीबोगरीब फरमान लागू किया गया है। अब अगर कोई आम नागरिक अपनी समस्या लेकर उपायुक्त (DC) से मिलने जाता है, तो उसे अपना मोबाइल फोन दफ्तर के बाहर ही जमा कराना होगा। इस नए नियम ने निगम की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भ्रष्टाचार के दाग और मोबाइल पर पाबंदी

बता दें कि लगभग डेढ़ महीने पहले इसी जोन के तत्कालीन उपायुक्त अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी दिव्यांशु गौतम को सीबीआई ने 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस घटना के कुछ ही दिन बाद एक निलंबित सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर ने तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी, जिसने सुसाइड नोट में अधिकारियों पर बहाली के बदले रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। इन घटनाओं के बाद नई उपायुक्त ममता यादव की तैनाती हुई, लेकिन सुधार के बजाय अब फरियादियों की आवाज़ दबाने की कोशिश के आरोप लग रहे हैं।

क्यों जमा कराए जा रहे मोबाइल?

उपायुक्त कार्यालय के बाहर मोबाइल जमा करने की जिम्मेदारी पीए रणधीर कुमार को सौंपी गई है। इस विवाद पर उपायुक्त ममता यादव का तर्क है कि कई लोग ऑफिस के अंदर मोबाइल लाकर रिकॉर्डिंग करने लगते हैं, जिसे रोकने के लिए यह नियम बनाया गया है। हालांकि, लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बंद कमरे की बातचीत को रिकॉर्ड होने से इतना डर क्यों है?

पूर्व मेयर ने घेरा, बताया 'तानाशाही'

इस नियम का विरोध अब राजनीतिक स्तर पर भी शुरू हो गया है। पूर्व महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने एक वीडियो जारी कर इस कदम को 'तानाशाही' करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब एमसीडी कमिश्नर से मिलने के लिए मोबाइल जमा नहीं करवाना पड़ता, तो एक जोन की उपायुक्त ऐसा नियम कैसे बना सकती हैं? यह जनता की आवाज को दबाने और भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है।

जनता में भारी रोष

आपको बता दें कि इस नए फरमान को लेकर स्थानीय निवासियों और फरियादियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल जमा कराना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह अधिकारियों की मंशा पर भी शक पैदा करता है। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के बजाय, रिकॉर्डिंग से बचने के लिए तकनीक पर पाबंदी लगाना समझ से परे है।

Updated on:
15 May 2026 12:55 pm
Published on:
15 May 2026 12:55 pm