- रोहिंग्या, बांग्लादेशियों, दिल्ली दंगे के बाद मस्जिदों के इमामों के वेतन के मुद्दा पर किया पलटवार -केजरीवाल का वादा, फिर से बनी सरकार तो मंदिर के पुजारियों और गुरुद्वारा ग्रंथियों को मिलेंगे हर महीने 18 हजार
शादाब अहमद
नई दिल्ली। दिल्ली के विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले सियासी माहौल गर्म हो रहा है। भाजपा धीरे-धीरे चुनाव को धार्मिक ध्रुवीकरण के रस्ते पर ले जाने की कोशिश कर रही है। भाजपा की इस रणनीति को आम आदमी पार्टी ने भांपते हुए अब चुनाव को ध्रुवीकरण से बचाने के लिए पुरजोर कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंदिर के पुजारी और गुरुद्वारे की ग्रंथियां को हर महीने 18000 रुपए का वेतन देने की घोषणा कर बड़ा दांव चला है।
दरअसल, भाजपा अपने चिर परिचित हिंदुत्व के एजेंडे को दिल्ली चुनाव में तेजी के साथ आगे बढ़ा रही है। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी भी भाजपा के इस एजेंडे की काट में कुछ ना कुछ नया करने की कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी के केजरीवाल ने पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना को लागू करने की घोषणा की है। केजरीवाल ने वादा किया है कि दिल्ली में फिर से सरकार बनने पर इस योजना को लागू कर मंदिर के पुजारी और गुरुद्वारा के ग्रंथी को हर महीने 18000 रुपए का वेतन दिया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत मंगलवार को केजरीवाल कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर से करेंगे।
रोहिंग्या को बसाने के मामले में केजरीवाल सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। केजरीवाल ने फिर दोहराया कि हरदीप सिंह के पास रोहंगियों को बसाने का पूरा डेटा है, जिसकी जानकारी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी है। इसलिए इस मामले में भाजपा को नौटंकी करने की जरूरत नहीं है।
भाजपा के प्रचार अभियान में दिल्ली देंगे में पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका के साथ रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोगों के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया जा रह है। इसके साथ ही मस्जिद के इमामों को वक्फ बोर्ड की ओर से हर महीने मिलने वाले 18000 रुपए के वेतन पर भी सवाल किए हैं। इन मुद्दों के दम पर भाजपा अपनी हिंदुत्व के एजेंडे को धार दे रही है।
आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा के हिंदुत्व वादी एजेंडा बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। यह भावनात्मक मुद्दा है, जिसका कई चुनावों में गहरा असर हुआ है। यही वजह है कि इस एजेंडे को हम गंभीरता से ले रहे हैं, जिसकी वजह से इसकी काट के लिए लगातार पलटवार किए जा रहे हैं।