
Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी के मुखिया के जज बदलने की मांग पर विवाद बढ़ गया है। कई वकीलों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने CJI को पत्र लिखकर इस मांग की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए CJI से अदालत की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की है।
कथित शराब घोटाले की सुनवाई के दौरान जज बदलने की अरविंद केजरीवाल की मांग ने अब एक नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए देश के कई प्रतिष्ठित वकीलों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को एक संयुक्त पत्र लिखकर अपनी गहरी चिंता जताई है। पत्र में अरविंद केजरीवाल की इस मांग को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर एक सीधा प्रहार बताया गया है। इन विशेषज्ञों का तर्क है कि अपनी पसंद का जज चुनने या मौजूदा जज पर अविश्वास जताने की यह कोशिश अदालती प्रक्रिया को प्रभावित करने की एक खतरनाक रणनीति है। उन्होंने सीजेआई से आग्रह किया है कि न्यायपालिका के सम्मान और इसकी संस्थागत गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी पक्ष न्यायिक प्रणाली पर इस तरह का दबाव बनाने का साहस न कर सके।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जज बदलने की मांग पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त करने और सीबीआई अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश के बाद, मामला हाई कोर्ट पहुंचा था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में सुनवाई शुरू होते ही केजरीवाल ने उन पर पक्षपात का संदेह जताते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से बेंच बदलने की गुहार लगाई थी। हालांकि, वहां से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस कदम के खिलाफ देश के कई प्रतिष्ठित वकीलों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने लामबंद होकर सीजेआई सूर्यकांत को पत्र लिखा है। उन्होंने केजरीवाल की इस मांग को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की है और मांग की है कि अदालत के सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
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Updated on:
18 Mar 2026 06:18 pm
Published on:
18 Mar 2026 06:18 pm
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