नई दिल्ली

तलाक केस में पेश की थी पत्नी की निजी तस्वीरें, दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा देने से किया इनकार, लेकिन पति-वकीलों को लगाई फटकार

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने तलाक केस में पत्नी की निजी तस्वीरें कोर्ट में दाखिल करने के मामले में पति और उसके वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए भविष्य के लिए सख्त चेतावनी दी।
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Delhi High Court Divorce Case
दिल्ली हाईकोर्ट (Photo-IANS)

Delhi High Court Divorce Case: दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को एक ऐसे तलाक के केस की सुनवाई हुई जिसमें पति ने तलाक की याचिका के साथ पत्नी की प्राइवेट फोटोज साथ में कोर्ट में पेश कर दी थी। हालाांकि इस केस में कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया और पति और वकीलों को खरी-खोटी सुनाया। इस केस की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता ने की। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पत्नी ने आरोप लगाया कि पति और उसके वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2015 के उस आदेश का पालन नहीं किया। उस आदेश में साफ कहा गया है कि तलाक या दूसरे वैवाहिक मामलों में अगर किसी की पर्सनल या संवेदनशील तस्वीरें या दस्तावेज अदालत में जमा करने हों, तो पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी और उन्हें सीलबंद लिफाफे में ही जमा करना होगा।

जानिए क्या है पूरा मामला?

दंपती की शादी फरवरी 2022 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही रिश्ते बिगड़ गए। अगस्त 2023 में पत्नी ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी। पत्नी का आरोप है कि याचिका के साथ उसकी निजी तस्वीरें बिना सीलबंद लिफाफे और बिना पहचान छिपाए कोर्ट में जमा की गई थी। जनवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पत्नी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। साथ ही पति और उसके वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की।

पति के पक्ष का जवाब

सुनवाई के दौरान पति और उसके वकीलों ने अदालत को बताया कि उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के 2015 के उस फैसले की जानकारी नहीं थी, जिसमें निजी और संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने बिना किसी शर्त के माफी मांगी और कहा कि तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए फैमिली कोर्ट में अप्लाई भी कर दिया गया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि इस मामले में अवमानना की कार्रवाई तो नहीं बनती, लेकिन पत्नी की निजी तस्वीरों को इस तरह खुले रिकॉर्ड में जमा करना बिल्कुल सही नहीं था और यह बड़ी लापरवाही है। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील तस्वीरें या दस्तावेज कोर्ट में तभी पेश किए जाने चाहिए, जब पहले अदालत की अनुमति ली जाए, व्यक्ति की पहचान छिपाई जाए और उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। अदालत ने दोनों वकीलों को भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की चेतावनी दी और कहा कि कोई भी वकील अपने मुवक्किल का केस लड़ते समय दूसरे पक्ष की इज्जत और निजता को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

अवमानना की कार्रवाई से किया इनकार

अदालत ने पति और उसके वकीलों की माफी स्वीकार कर ली और उनके खिलाफ अवमानना की कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि पत्नी की निजी तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटाकर सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इन तस्वीरों को सिर्फ कोर्ट के आदेश पर ही खोला जाएगा। इसके अलावा पत्नी को अपनी पहचान छिपाकर रखने की भी अनुमति दे दी गई।

Published on:
02 Jul 2026 11:59 am
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