
Delhi NCR News: दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त नियम लागू हैं, लेकिन बाजारों में इनका पालन हो रहा है या नहीं, इस पर अब अदालत ने सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग तरह के पटाखे बिकने और कई डिब्बों पर QR कोड नहीं होने की बात सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने पूछा है कि जब केवल ग्रीन पटाखे बेचने की इजाजत है, तो दूसरे पटाखे बाजारों में कैसे पहुंच रहे हैं?
मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने मीडिया में आई खबरों का जिक्र किया। उन्होंने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस मामले को सरकार के सामने रखने को कहा। अदालत का जोर इस बात पर है कि दिवाली के लिए दी गई सीमित छूट का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक ही हो। सिर्फ आदेश जारी कर देने से काम नहीं चलेगा, उनका पालन भी जमीन पर दिखना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों की बिक्री की इजाजत दी है, जिन्हें CSIR-NEERI से प्रमाणन मिला हो और जिनके पास जरूरी लाइसेंस हों। हर डिब्बे पर उसी उत्पाद और बैच का अलग QR कोड होना जरूरी है। इसे स्कैन करने पर पटाखा बनाने वाली कंपनी, प्रमाणन, लाइसेंस और जांच से जुड़ी जानकारी मिलनी चाहिए।
बिना QR कोड या फर्जी कोड वाले पटाखे बेचने की अनुमति नहीं है। डिब्बे पूरी तरह सील होने चाहिए, ताकि उनमें सामान्य पटाखे मिलाकर न बेचे जा सकें। लड़ी, पटाखों की माला और बेरियम वाले पटाखों पर भी रोक है। अदालत ने ऑनलाइन बिक्री पर भी पाबंदी लगाई है। पटाखे केवल प्रशासन की ओर से तय जगहों पर ही बेचे जा सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर को ही ग्रीन पटाखे जलाने की छूट दी है। दोनों दिन सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे। बिक्री के लिए 4 से 6 नवंबर तक का समय तय किया गया है। 9 नवंबर से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पहले की तरह पूरी रोक फिर लागू हो जाएगी।
अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और तय साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने की मनाही है। यह पाबंदी शिक्षण संस्थानों के आसपास भी लागू रहेगी।
अदालत ने प्रशासन और पुलिस को बाजारों में जांच करने, QR कोड की पड़ताल करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि तय तारीखों से पहले ही बाजारों में नियमों की अनदेखी रोकने के लिए अधिकारी कितनी सख्ती दिखाते हैं।