Delhi Crime Branch Arrest: दिल्ली पुलिस ने बालेश उर्फ अमन को गिरफ्तार किया है, जो 19 साल पहले खुद को मृत घोषित करवाकर फरार हो गया था। उसने अपनी मौत का नाटक रचने के लिए दो मजदूरों की हत्या कर दी थी।
Indian Navy Sailor Murder Case: दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है जिसने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए दो मासूम मजदूरों की बेरहमी से हत्या कर दी और खुद को मृत घोषित करवा दिया। बालेश (जो अब 'अमन' बनकर रह रहा था) पर हत्या, चोरी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं। वह पिछले 19 सालों से सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत' था, लेकिन हकीकत में वह अपनी पहचान बदलकर मजे से जिंदगी जी रहा था।
आपको बता दें कि बालेश का जन्म 1964 में दिल्ली के किशनगंज में हुआ था। उसने 1981 में भारतीय नौसेना में स्टीवर्ड के रूप में नौकरी शुरू की। 1996 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद वह दिल्ली के उत्तम नगर में बस गया और ट्रक ड्राइवर बन गया। अपराध की दुनिया में उसका कदम साल 2000 में पड़ा, जब उसे नौसेना की कैंटीन से क्रॉकरी चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
साल 2004 में बालेश ने अपने साले खुशी राम की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या की वजह अवैध संबंधों का शक बताई गई। जब पुलिस बालेश के करीब पहुंचने लगी, तो उसने फांसी की सजा से बचने के लिए 'मौत का नाटक' करने की योजना बनाई।
बालेश ने अपनी मौत को असली दिखाने के लिए एक रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश रची। दरअसल, उसने दो मजदूरों (मोहित और मनोज) को काम देने का झांसा दिया और अपने ट्रक में बैठा लिया। जोधपुर के पास उसने उन्हें शराब पिलाई और फिर ट्रक में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। दोनों मजदूर जिंदा जल गए। बालेश की पत्नी संतोष और उसके भाई ने जोधपुर जाकर जले हुए शवों में से एक को बालेश का बताकर उसकी शिनाख्त की। बिना डीएनए टेस्ट के पुलिस ने उसे बालेश मान लिया और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया। बालेश के 'मरने' के बाद उसकी पत्नी को 18,000 रुपये महीने की पेंशन, 3 लाख रुपये ट्रक का बीमा और 6 लाख रुपये जीवन बीमा का क्लेम मिला।
2010 में जब आधार कार्ड की शुरुआत हुई, तो बालेश ने अपनी पहचान बदलकर 'अमन सिंह' नाम से नया आधार कार्ड बनवा लिया। उसने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ नजफगढ़ के पास नया घर बसाया। पड़ोसियों को बताया गया कि 'अमन' बालेश का छोटा भाई (देवर) है, जबकि उसकी पत्नी 'विधवा' होने का ढोंग करती रही।
साल 2019 में पुलिस को पहली बार सुराग मिला कि चोरी के मामले में मृत घोषित किया गया शख्स जिंदा है। 2023 में एक ठोस जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने कड़ियां जोड़ीं। बीमा कंपनी के रिकॉर्ड और जोधपुर से मिले मृत्यु प्रमाणपत्र की जांच की गई। आखिरकार, द्वारका इलाके से बालेश को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया। वर्तमान में पटियाला हाउस कोर्ट ने बालेश की उम्र को देखते हुए उसे 1 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है, लेकिन उसे हर हफ्ते क्राइम ब्रांच के दफ्तर में हाजिरी लगानी होगी।