जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने इस मामले में भागवत पुराण का उल्लेख करते हुए बेहद भावुक और तार्किक टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी को माता-पिता बनने का सौभाग्य मिलेगा या नहीं, यह पूरी तरह से 'दैव' (किस्मत) पर निर्भर करता है। मेडिकल बोर्ड ने आशंका जताई थी कि जवान के शरीर में जीवित शुक्राणु मिलना मुश्किल है, जिस पर कोर्ट ने कहा कि जो चीज शारीरिक रूप से असंभव लग रही है, उस पर जिद करके याचिकाकर्ता की किस्मत में दखल नहीं देना चाहिए।