Ali khamenei iran: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर किए जा रहे दावों के बाद भारत में शिया समुदाय में शोक और आक्रोश देखा गया। दिल्ली के ईरान कल्चरल सेंटर पर लोगों ने संवेदना जताई, जबकि शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अली मोहसिन तकवी ने इसे दुनिया के लिए खतरनाक दौर बताते हुए वैश्विक अस्थिरता पर चिंता जताई।
Ali khamenei iran: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर सोशल मीडिया और कुछ विदेशी रिपोर्ट्स में किए जा रहे दावों के बाद भारत के कई हिस्सों में शिया समुदाय में आक्रोश और शोक का माहौल देखा गया। दिल्ली में ईरान कल्चरल सेंटर पर लोगों ने पहुंचकर संवेदना जताई, जबकि अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। दिल्ली स्थित शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अली मोहसिन तकवी ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है और ताकत के दम पर सरकारों को खत्म करने की प्रवृत्ति वैश्विक अस्थिरता बढ़ा रही है।
पीटीआई से बातचीत में मौलाना तकवी ने चिंता जताई कि यदि किसी देश के शीर्ष नेतृत्व को बमबारी के जरिए निशाना बनाए जाने की बातों को सामान्य किया गया, तो इसका संदेश पूरी दुनिया के लिए खतरनाक होगा। उन्होंने कहा कि आज एक देश, कल दूसरा-इस तरह की सोच अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती है और शांति के दावों पर सवाल खड़े करती है।
मीडिया से बातचीत में मौलाना मोहम्मद अली मोहसिन तकवी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज निशाने पर ईरान है, कल तुर्की और उसके बाद सऊदी अरब-यानी यह सिलसिला किसी पर भी आ सकता है और यही संदेश दुनिया को दिया जा रहा है। खामेनेई की मौत की खबर पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में देशों की संप्रभुता का महत्व खत्म होता दिख रहा है; ताकतवर देश जिसे चाहें जिंदा रखें और जिसे चाहें मिटा दें। आज की वैश्विक राजनीति में यह धारणा खतरनाक रूप ले रही है, खासकर जब संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी महाशक्ति पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हों।
मौलाना ने वैश्विक राजनीति में अपनाए जा रहे दोहरे मापदंडों पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस देश ने हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराकर लाखों लोगों की जान ली, वही आज हजारों हथियारों का भंडार रखे हुए है। दूसरी ओर, कोई देश यदि खुद को सुरक्षित रखने के लिए परमाणु क्षमता विकसित करने की बात करे तो उसे रोका जाता है। उन्होंने कहा कि जिन देशों में युद्धों के चलते लाखों लोग मारे गए, वही खुद को दुनिया का सबसे बड़ा शांतिप्रिय बताकर शांति स्थापित करने का दावा करते हैं, लेकिन ऐसी ‘शांति’ का स्वरूप क्या है, यह पूरी दुनिया देख रही है।