दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं के साथ 50 किलो का केक काटा और जन्मदिन मनाया।
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं के साथ 50 किलो का केक काटा और जन्मदिन मनाया। हालांकि बाद में उन्होंने अपने समर्थकों से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबियत खराब होने का वास्ता देकर जन्मदिन न मनाने की बात कही। और फिर गुरुवार की देर शाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एम्स में आखिरी सांस ली। इनसबके बीच अरविंद केजरीवाल के जन्मदिन के खिलाफ दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन यानी परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारी धरने पर बैठे थे। बता दें कि धरना देने वालों में अधिकतर वे लोग थे जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य डीटीसी में काम करता था और उसकी मृत्यु के बाद ये नौकरी के दावेदार हैं। इनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो बीते10-15 वर्षों से नौकरी की आस लिए हुए है। दिल्ली में इससे पहले कांग्रेस की सरकार ने भी इनलोगों से वादा किया था लेकिन अभी तक इनलोगों को नौकरी नहीं मिली है।
मंडन कर लोगों ने जताया अपना विरोध
आपको बता दें कि डीटीसी के कुछ कर्मचारियों ने अरविंद केजरीवाल के जन्मदिन को शौक दिवस के रूप में मनाया और सैंकड़ों प्रार्थियों ने अपने सिर का मुंडन कराया। सभी लोगों का कहना था कि आज का दिन मुख्यमंत्री के लिए खुशी का दिन हो सकता है लेकिन हमारे लिए यह शोक का दिन है। डीटीसी कर्मियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अब तक अपना वादा पूरा नहीं किया है। इधर एक युवा कांग्रेस नेता ने केजरीवाल को घेरा और कई आरोप लगाए। एक ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा ‘CM हाउस में गुब्बारों की सजावट, 50 किलो का केक कटने के बाद। @ArvindKejriwal बोले कि हम उत्सव नहीं मनाएंगे। बचा क्या था’? केजरीवाल के केक काटने की घटना को लोगों ने अटल बिहारी का अपमान बताया। एक ट्वीटर यूजर ने लिखा कि 'आज का दिन कितना अजीब है, भारत के महान, आदरणीय, पूज्य, भारत की शान अटल जी के निधन का दिन है, वही दूसरी और दारूबाज, घोटालेबाज, धरनादारी को 50 साल पूरे हो गए....एक राजनीति की शान और एक राजनीति पर कलंक'।