
नई दिल्ली। अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंकाओं ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन की शुरुआत में ही देश में सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने के बाद कृषि मंत्रालय ने 315 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां खेती पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केंद्र ने पहली बार जिला स्तर तक विस्तृत आकस्मिक कृषि योजनाओं को सक्रिय करने, जल संरक्षण अभियानों को तेज करने और दिल्ली में विशेष ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ बनाने का फैसला किया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। प्रभावित जिलों का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे बड़े कृषि राज्यों में स्थित है। इन राज्यों की खरीफ पैदावार का सीधा असर राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ता है।
बैठक के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारो से कहा कि कमजोर मानसून से खरीफ की फसल पर असर पड़ सकता है। इसको देखते हुए हम तैयारी कर रहे हैं। प्रभावित जिलों का आकलन किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी की हर बूंद कीमती है। तालाब, डैम और खेत-तालाब से जल संरक्षण की बड़ी मुहिम चलाएंगे। साथ ही कम अवधि, कम पानी वाली फसलें, दलहन, मोटा अनाज और तिलहन पर फोकस किया जाएगा। बीज, खाद और चारा की अग्रिम व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि अल नीनो के दौर में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान नीधि संकट-सहारे हैं। उन्होंने कहा कि आकस्मिकता योजना बनाया जा रहा है।
कम बारिश वाले 315 संभावित प्रभावित जिलों में से 111 जिले ऐसे हैं जहां सिंचाई कवरेज 25 प्रतिशत से भी कम है। ये जिले सबसे ज्यादा जोखिम वाले माने गए हैं। 76 जिलों में सिंचाई 25 से 50 प्रतिशत के बीच है, जबकि 128 जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई व्यवस्था है।
शिवराज ने कहा कि इस साल धान जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों पर निर्भरता कम करने की कोशिश होगी। कम पानी की वैकल्पिक फसलों की बुवाई करवाई जाएगी। किसी भी हालत में खेतों को खाली नहीं रहने दिया जाएगा।