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दिल्ली मर्डर केस: सात घंटे, नौ टीमें और एक सफेद गाड़ी जिसने ‘कातिल’ को पकड़वाया

Delhi Girl Murder Case: दिल्ली के महरौली में 10 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। पुलिस जब आरोपी कैब ड्राइवर को घटनास्थल पर लेकर गई, तो उसने मौका देखकर भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उसका हाफ एनकाउंटर करते हुए उसके पैर में गोली मार दी और उसे दोबारा हिरासत में ले लिया।
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पुलिस एनकाउंटर में गिरफ्तार आरोपी।

Delhi Girl Murder Case Update: दिल्ली में गुब्बारे बेचने वाली 10 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या करने वाला कातिल पुलिस गिरफ्त में है। दिल्ली पुलिस ने महज 7 घंटे के अंदर ही आरोपी को खोज निकाला। सोमवार सुबह हुई इस दिल दहला देने वाली वारदात के बाद पुलिस ने चौतरफा घेराबंदी करते हुए आरोपी टैक्सी ड्राइव को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचन बशु कुमार सिंह के रूप में हुई है।

तुरंत हरकत में आई पुलिस

यह वारदात सोमवार सुबह करीब 4 बजे हुई। बच्ची छतरपुर इलाके में CDR चौक के पास सड़क किनारे अपने परिवार के साथ सो रही थी। आरोपी वहां पहुंचा और उसे जबरदस्ती उठाकर अपने साथ ले गया। बच्ची की चीख से पिता की आंख खुली और उन्होंने आरोपी को रोकने की कोशिश भी की, लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद करीब 5 बजे परिवार ने PCR कॉल के जरिए महरौली थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू हुई। 

CCTV और ह्यूमन इंटेलिजेंस से खुला राज

बच्ची के पिता ने पुलिस को केवल इतना बताया कि किडनैपर शायद सफेद कार में था। पुलिस ने सबसे पहले आसपास लगे CCTV कैमरों को खंगालना शुरू किया। शुरुआती जांच में यह अंदाजा लगाया गया कि आरोपी शायद कोई कैब ड्राइवर है। इस के आधार पर कैब एग्रीगेटर्स कंपनियों से पूछताछ हुई। CCTV में पुलिस को दूर अंधेरे में खड़ी एक कार नजर आई, यह इस केस का पहला सुराग था। इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाना शुरू किया कि उस समय क्या कोई कैब इलाके में मौजूद थी? पुलिस ने कैब एग्रीगेटर्स से संपर्क किया ताकि उस खास क्वाड्रेंट में सभी रजिस्टर्ड गाड़ियों का लैटीट्यूड और लॉन्गीट्यूड डेटा चेक किया जा सके।

पुलिस को दिखा पैटर्न

इसके साथ ही पुलिस ने करीब 70 दूसरे कैमरे भी खंगाले, जिससे एक पैटर्न बनता नजर आया। पुलिस ने आरोपी की कार का एक इलेक्ट्रॉनिक रूट तैयार किया। उधर, एग्रीगेटर्स से मिली जानकारी से पुलिस को दूसरा और पुख्ता सुराग मिल गया। GPS कोऑर्डिनेट्स को CCTV फुटेज पर टाइमस्टैम्प के साथ क्रॉस-रेफरेंस करके, महरौली SHO रितेश शर्मा के नेतृत्व में 15 पुलिसवालों की टीम ने सफेद कैब पर फोकस किया।

एक गलती पड़ी भारी

पुलिस को अब तह पता चल गया था कि आरोपी एक व्हाइट कार में बच्ची को ले गया है और कैब ड्राइवर है, लेकिन वो कहां है, इसकी कोई लीड नहीं थी। आरोपी ने वारदात से पहले अपना मोबाइल फोन भी बंद कर दिया था। इस बीच, पुलिस को आरोपी के भाई के बारे में जानकारी मिली, जो गुरग्राम में था।

पुलिस की एक टीम तुरंत उसके घर पहुंची और पूछताछ की। हालांकि, आरोपी का अब तक पता नहीं चल सका था। हर गुजरता पल पुलिस को भारी पड़ रहा था, क्योंकि बच्ची की जान खतरे में थी। बाशु कुमार सिंह ने वारदात को अंजाम देने के बाद राइड लेने के लिए जब अपना फोन ऑन किया और ये उसकी आखिरी गलती साबित हुई। इससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिली। दोपहर तक, टेक्नोलॉजी और अपने नेटवर्क के मदद से पुलिस को आरोपी की कार पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी में मिल गई और ड्राइवर को पकड़ लिया। पूछताछ के बाद जब पुलिस जब आरोपी को घटनास्‍थल पर लेकर गई तो उसने भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी और उसे पकड़ लिया।

पुलिस ने किया खुलासा: आरोपी ने कबूला जुर्म

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद शुरुआत में आरोपी ने बच्ची के बारे में कुछ भी जानने से इनकार किया। हालांकि, सख्ती से पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए बच्ची की हत्या की बात स्वीकार की। आरोपी ने पुलिस को बताया कि अपहरण के बाद वह बच्ची को लगभग 20 किलोमीटर दूर गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर ले गया था। रास्ते में उसने बच्ची को गाड़ी में बांधकर रखा। इसके बाद एक सुनसान इलाके में गाड़ी रोककर वह उसे जंगल में ले गया, जहां उसने पहले उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह शव वहीं छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद आरोपी गुरुग्राम से एक सवारी लेकर विकासपुरी की ओर निकला, जहां पुलिस ने उसे दबोच लिया।

बिहार का रहने वाला है आरोपी

आरोपी बशु कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के छपरा का रहने वाला है और पेशे से कैब ड्राइवर है। आरोपी तीन कैब एग्रीगेटर्स के साथ जुड़ा हुआ था। पुलिस ने अनुसार, पीड़ित परिवार भी मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। वह वो किराए पर रहता था, लेकिन गरीबी के चलते किराया नहीं दे पाए तो घर खाली करना पड़ा। इसके बाद परिवार फुटपाथ पर ही रहने लगा था। बच्ची गुब्बारे बेचती थी, जबकि माता पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।