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कनेक्टिविटी से आगे बढ़ा पूर्वोत्तर, रेलवे गढ़ रहा आर्थिक और सामरिक ढांचा

पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क का विस्तार अब केवल कनेक्टिविटी परियोजना नहीं रह गया है। इम्फाल, आइजोल और गंगटोक तक रेल पहुंचाने की कवायद, रिकॉर्ड ऊंचाई वाले पुलों और सामरिक सुरंगों के निर्माण के साथ ऐसे ढांचे का निर्माण कर रही है, जो व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को गति देने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की पहुंच और रसद आपूर्ति को भी मजबूत करेगा
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नई दिल्ली

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Shadab Ahmed khan

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Updated: 24 Jun 2026, 4:04 PM IST

Indian Rail

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क का विस्तार अब केवल कनेक्टिविटी परियोजना नहीं रह गया है। इम्फाल, आइजोल और गंगटोक तक रेल पहुंचाने की कवायद, रिकॉर्ड ऊंचाई वाले पुलों और सामरिक सुरंगों के निर्माण के साथ ऐसे ढांचे का निर्माण कर रही है, जो व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को गति देने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की पहुंच और रसद आपूर्ति को भी मजबूत करेगा। इसी कारण इन परियोजनाओं को पूर्वोत्तर में उभरते आर्थिक और रणनीतिक गलियारों की नींव माना जा रहा है।

रेलवे ने पूर्वोत्तर में विकास का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। पहले चरण में ब्रॉडगेज नेटवर्क के विस्तार पर जोर था, जबकि अब फोकस राजधानी शहरों, सीमावर्ती इलाकों और संभावित व्यापार मार्गों को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने पर है। इसी दिशा में 2026-27 के लिए क्षेत्र को 11,486 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2009-14 के औसत 2,122 करोड़ रुपए से पांच गुना से अधिक है।

12 साल में 1900 किमी रेल लाइन बिछी

पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर में 1,900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइन बिछाई गई है, जबकि 2009-14 के दौरान यह आंकड़ा 333 किलोमीटर था। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेल पटरियों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है और असम अंतिम चरण में है।

अंतिम निर्माण चरण में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे नोनी पुल

जिरीबाम-इम्फाल परियोजना के तहत बन रहा 141 मीटर ऊंचा नोनी पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर पुल होगा। 703 मीटर लंबा यह पुल अपने विशाल पियरों के लिए उन्नत हाइड्रोलिक ऑगर तकनीक का उपयोग करके बनाया जा रहा है। यह 139 मीटर ऊंचे मोंटेनेग्रो के माला-रिजेका पुल को पीछे छोड़ देगा।

पूर्वोत्तर रेलवे की बड़ी परियोजनाएं

भैरबी-सैरांग लाइन : आइजोल को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, अंतिम चरण में

जिरीबाम-इम्फाल लाइन : पहली बार मणिपुर की राजधानी तक रेल पहुंचेगी।

सेवोक-रंगपो लाइन : सिक्किम को पहली रेल कनेक्टिविटी।

पूर्वोत्तर परियोजनाओं के सामरिक फायदे

1. चीन और म्यांमार सीमा तक सड़क के साथ रेल नेटवर्क से सीमावर्ती इलाकों तक हर मौसम में संपर्क मजबूत

2.बोगीबील पुल और भूपेन हजारिका सेतु सैन्य और भारी सैन्य उपकरणों और टैंकों की आवाजाही के अनुरूप

3.जिरीबाम-इम्फाल रेल लाइन और सेला सुरंग से सैनिकों और आपूर्ति सामग्री की तेजी से आवाजाही संभव होगी।

4.पुल और सुरंगें संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त और अधिक भरोसेमंद वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएंगी।

5.बेहतर रेल संपर्क से पूर्वोत्तर, दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार और संपर्क का प्रवेश द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    6.सीमावर्ती राज्यों में स्थायी अवसंरचना से सैन्य तैयारियों और आपदा प्रबंधन क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।

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