नई दिल्ली

सूरज और हवा से बनी बिजली पानी में होगी स्टोर

लक्ष्य 2035 तक स्थापित हों देश में 100 गीगावाट क्षमता की वाटर बैटरियां अभिषेक सिंघल नई दिल्ली। देश में तेजी के साथ बढ़ रही ग्रीन ऊर्जा के साथ ही सबसे बड़ी चिंता उसे स्टोर कर कम उत्पादन वाले समय में उपयोग करना है। बैटरी आधारित स्टोरेज के साथ ही केन्द्र अब वाटर बैटरी विकसित करने […]

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लक्ष्य 2035 तक स्थापित हों देश में 100 गीगावाट क्षमता की वाटर बैटरियां

अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। देश में तेजी के साथ बढ़ रही ग्रीन ऊर्जा के साथ ही सबसे बड़ी चिंता उसे स्टोर कर कम उत्पादन वाले समय में उपयोग करना है। बैटरी आधारित स्टोरेज के साथ ही केन्द्र अब वाटर बैटरी विकसित करने में जुट गया है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने 2035 तक 5.8 लाख करोड़ रूपए के निवेश से 100 गीगावाट पानी आधारित पंप्ड बिजली स्टोरेज (पीएसपी) क्षमता का लक्ष्य रखा है। अभी देश में केवल 7.2 गीगावाट क्षमता है। गौरतलब है कि ग्रीन ऊर्जा यानी रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ने के साथ ग्रिड की स्टेबिलिटी के लिए स्टोरेज क्षमता का विकास करना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य पंप्ड स्टोरेज विकास में अग्रणी हैं। वहीं राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी तेजी से इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।

स्टोरेज की क्या है जरूरत

सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता मौसम और समय पर निर्भर होती है। दिन में उत्पादन ज्यादा होता है वहीं रात में बिजली की मांग अधिक होने से आपूर्ति- मांग में असंतुलन रहता है। कई बार दिन में सौर-पवन ऊर्जा संयंत्रों से बिजली उत्पादन रोकना पड़ता है।

क्या है वाटर बैटरी या पंप्ड स्टोरेज

पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसपी) जिन्हें वॉटर बैटरी भी कहा जाता है। पीएसपी में कम मांग के समय बिजली से पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है। जब मांग अधिक होती है, तो यही पानी नीचे बहा कर टर्बाइन घुमा बिजली पैदा की जाती है। सीईए का मानना है कि यह प्रणाली लंबे समय तक बिजली भंडारण का सबसे भरोसेमंद तरीका है। पीएसपी देश को ब्लैकआउट से बचाने, आपातकालीन स्थिति में त्वरित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और थर्मल संयंत्रों पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगी।

ऐसे बढ़ेगी नवीकरण उर्जा देश में

वर्ष गीगावाट
2030 500
2035 701
2047 2187

ऐसे बढ़ेगी देश की स्टोरेज जरूरत

वर्ष गीगावाट
2029-30 62
2034-35 161
2046-47 476

आंकड़ों की नजर

  • देश की कुल पीएसपी संभावित क्षमता: 266 गीगावाट
  • वर्तमान संचालित पीएसपी 7.2 गीगावाट
  • निर्माणाधीन परियोजनाएं: 11.6 गीगावाट
  • सर्वे व जांच में परियोजनाएं: 75 गीगावाट
  • 2035-36 तक लक्ष्य: 100 गीगावाट
  • देश में अनुमानित निवेश 2035 तक: 5.8 लाख करोड़ रूपए

पंप्ड स्टोरेज को प्राथमिकता क्यों ?

  • सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता को बैलेंस करेगा
  • 6-8 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति संभव
  • 100 वर्षों तक उपयोगी
  • बैटरियों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल

राजस्थान में हैं बड़ी संभावनाएं

सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राजस्थान की भौगोलिक बनावट और मैदानी क्षेत्र इसे ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड लूप पीएसपी के लिए आदर्श बनाते हैं। राजस्थान में फिलहाल शाहपुर, सिरोही, ब्राह्मणी और सुखपुरा जैसे क्षेत्रों में कुल लगभग 6,160 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं सर्वे और जांच चरण में हैं। इससे स्थानीय स्तर बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। नवीकरणीय ऊर्जा की बर्बादी (कर्टेलमेंट) कम होगी। राज्य में 2034-35 तक कुल 11323 मेगावाट स्टोरेज क्षमता विकसित होने की संभावना है जिसमें पीसपी और बीईएसएस दोनों शामिल हैं।

  • राजस्थान की कुल पीएसपी संभावित क्षमता: 12,560 मेगावाट
  • सर्वे और जांच चरण में परियोजनाएं: 6,160 मेगावाट

राजस्थान में प्रमुख प्रस्तावित परियोजनाएं

परियोजना मेगावाट संभावित शुरुआत
सिरोही 12002029-30
शाहपुर1800 2030-31
सुखपुरा 2560 2032-33
ब्राह्मणी 600 2032-33

इनके अलावा राजस्थान में अन्य संभावित परियोजनाएं

परियोजना मेगावाट
राणा प्रताप सागर 1200
सेमलिया-2 1200
सिरोही 640
बालोतरा 1800
कादम्बरी 1560
Published on:
27 Jan 2026 11:58 am
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