एसीजेएम देवबंद जेल में बंदियों से बात करने गए थे। इस दौरान एक बंदी ने बताया कि वह कोर्ट में तारीख पर जा रहा था रास्ते में उसे पुलिस ने उठा लिया और पैर में गोली मारकर मुठभेड़ दिखा दी।
Encounter Video सहारनपुर जिले के देवबंद उप कारागार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने पुलिस मुठभेड़ों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट जेल निरीक्षण के दौरान उन बंदियों से पूछताछ करते नजर आ रहे हैं, जिन्हें पुलिस मुठभेड़ में घायल बताकर गिरफ्तार किया गया था। एक बंदी बताता है कि पुलिस ने उसे रास्ते से उठाया और थर्ड डिग्री देकर घटना कबूलने के लिए कहा नहीं कबूली तो जंगल में ले जाकर पैर में गोली मार दी।
यह वीडियो करीब दो माह पुराना बताया जा रहा हैं। कहा जा रहा है कि, न्यायिक मजिस्ट्रेट परविन्द्र सिंह औचक निरीक्षण के लिए उप कारागार पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुठभेड़ में घायल हुए बंदियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी। उसी दौरान किसी ने पूछताछ का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब वायरल हो गया है। वायरल वीडियो ने पुलिस एनकाउंटर पर सवाल खड़े कर दिए हैं लेकिन पत्रिका इस वीडियो की पुष्टि नहीं करती।
वायरल वीडियो में एक बंदी मजिस्ट्रेट को बताता है कि उसे रास्ते से उठाकर पुलिस चौकी ले जाया गया और वहां उससे जबरन अपराध कबूल कराने के लिए थर्ड डिग्री दी गई। उसने आरोप लगाया कि चौकी में उसे करंट लगाया गया और बेरहमी से पीटा गया। जब उसने आरोप स्वीकार नहीं किए तो पुलिस उसे जंगल में ले गई और पैर पर कपड़ा रखकर नजदीक से गोली मार दी गई। मजिस्ट्रेट के सवाल पर बंदी ने यह भी दावा किया कि बाद में कट्टे से फायरिंग दिखाकर मुठभेड़ का नाटक रचा गया। उसने बताया कि उसकी उस दिन सहारनपुर में पेशी थी और वह बागपत से आ रहा था, तभी शामली के पास से उसे हिरासत में लिया गया।
इसी वीडियो में एक अन्य बंदी भी अपने पैर पर गोली के निशान दिखाते हुए लगभग यही घटनाक्रम दोहराता है। वह भी दावा करता है कि उसे हिरासत में लेकर पहले प्रताड़ित किया गया और बाद में मुठभेड़ का रूप देने के लिए गोली मारी गई। मजिस्ट्रेट क्रमवार सवाल पूछते दिखाई देते हैं और दोनों बंदी अपने-अपने तरीके से पूरी घटना का विवरण देते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। हालांकि, अब तक किसी भी स्तर पर इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामला पुराना है और वीडियो में लगाए गए आरोपों की बिंदुवार जांच की जा रही है।