Haryana News: फरीदाबाद के सरकारी अस्पताल से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक गर्भवती महिला को समय पर कोई डॉक्टरी मदद न मिलने के कारण अस्पताल के पार्क में बच्चे को जन्म देना पड़ा।
हरियाणा के फरीदाबाद से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल के पार्क में मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में बच्चे को जन्म देने पर मजबूर होना पड़ा। आरोप है कि अस्पताल का मेन गेट बंद था, जबकि अस्पताल परिसर में जाने पर भी कोई मेडिकल हेल्प समय पर नहीं मिली। घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है और दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
यह घटना शनिवार तड़के फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित 30 बेड वाले फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) अस्पताल में हुई। महिला का नाम बदोली गांव निवासी बलेश बताया जा रहा है। परिवार के मुताबिक, प्रसव पीड़ा शुरू होने पर बलेश को रात करीब 1:40 बजे सरकारी अस्पताल लाया गया था।
परिजनों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद मुख्य गेट बंद मिला। उन्होंने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया और मदद के लिए आवाज लगाई। इसके बाद परिवार को अस्पताल के पीछे की ओर दूसरा गेट मिला, जो खुला हुआ था। वहां से अंदर जाने के बाद भी कोई डॉक्टर, नर्स या अन्य स्टाफ उनकी मदद के लिए नहीं आया।
इस बीच महिला की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और प्रसव शुरू हो गया। मजबूरी में परिवार के लोगों ने ही अस्पताल परिसर के पार्क में ही डिलीवरी करवाई। पूरी प्रक्रिया मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में पूरी की गई। बाद में मां और नवजात को उसी अस्पताल में भर्ती किया गया।
बलेश ने बताया कि उनके पति और देवर लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन कोई स्टाफ नहीं आया। और जब तक कोई मदद पहुंचती, तब तक बच्चे का जन्म हो चुका था। दरअसल बलेश के साथ अस्पताल आई एक महिला को प्रसव का थोड़ा अनुभव था, उसने ही बच्चे की डिलीवरी करवाई।
जिला उप सिविल सर्जन डॉ. रचना ने कहा कि महिला के अस्पताल पहुंचने के कुछ ही मिनटों में डिलीवरी हो गई। रात में ओपीडी गेट बंद था, हालांकि इमरजेंसी के लिए दूसरा गेट खुला रखा गया था।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए। स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक के निर्देश पर जांच कराई गई।
हरियाणा नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के निदेशक विरेंद्र यादव ने कहा कि जांच में रात की ड्यूटी में गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने बताया कि ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी और स्टाफ नर्स उपलब्ध नहीं थे। मरीज के परिजनों ने जब उन्हें खोजने की कोशिश की, तब भी कोई नहीं मिला।
जांच के बाद दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि रात में मुख्य सड़क वाला गेट खुला रखा जाए ताकि आपातकालीन मरीजों को परेशानी न हो।