
Giriraj Singh Sonia Gandhi: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के लोकतंत्र को लेकर दिए बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी को अब सत्ता में लौटने का सपना छोड़ देना चाहिए। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 40 वर्षों से देश के नौ राज्यों में सत्ता में नहीं रही है।
गिरिराज सिंह ने सोनिया गांधी पर अपने बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘लॉन्च’ करने की कोशिश को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, भगवान आपको लंबी उम्र दे। अपने बेटे को लॉन्च करते-करते आप थक गई हैं। आप लोकतंत्र की बात करती हैं? आपको शर्म आनी चाहिए।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सोनिया गांधी लंबे समय तक भारत की नागरिकता के बिना देश में रहीं और उन पर वोट डालने के आरोप भी लगे हैं। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी जिक्र किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को सत्ता में लौटने की महत्वाकांक्षा छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 10 साल में वापसी की बात तो छोड़ दीजिए, कांग्रेस कभी इस देश में सत्ता में वापस नहीं आएगी। पिछले 40 वर्षों से आप नौ अलग-अलग राज्यों में सत्ता में नहीं रहे हैं। गिरिराज सिंह ने गांधी परिवार पर देश में गृहयुद्ध भड़काने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने देश में आपातकाल लगाया था और लोगों की आवाज दबाई थी, ऐसे में उसी पार्टी द्वारा लोकतंत्र की बात करना उचित नहीं है।
वहीं, कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने सोनिया गांधी की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासन में संविधान से कई तरह से समझौता किया गया है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोप लगाए। प्रियंक खरगे ने कहा कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की स्थिति नीचे आई है और Gen Z से लेकर सैनिकों तक लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है और चुनाव आयोग पर भी नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी सोनिया गांधी के बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी द्वारा लगाए गए आरोप ऐतिहासिक तथ्यों और मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने गठन के बाद से और उससे पहले जनसंघ के दौर में भी संविधान के कई प्रावधानों पर हमला किया। उन्होंने विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 15 से 25 और 26-27 का जिक्र किया। उन्होंने भाजपा पर देश की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सबसे बड़ा नुकसान देश के सामाजिक ताने-बाने को हुआ है।
दरअसल, विवाद की शुरुआत सोनिया गांधी के एक बयान के बाद हुई। उन्होंने कहा था कि 1975 में लागू 21 महीने की इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया गया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने परिस्थितियों को पहचाना और मार्च 1977 में आम चुनाव कराने का फैसला लिया। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था।