नई दिल्ली

122 करोड़ हेल्थ रिकॉर्ड के बाद अब बीमारी का ‘डिजिटल नक्शा’

सरकार इस विशाल स्वास्थ्य डेटा का इस्तेमाल एक तरह से देश में बीमारियों का डिजिटल नक्शा बनाने में करने जा रही है। इससे यह पता चलेगा कि किस इलाके में कौन-सी बीमारी बढ़ रही है, किन बीमारियों का दबाव ज्यादा है और इलाज के नतीजे कैसे बदल रहे हैं। इसके लिए एआई की मदद लेने की तैयारी है
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Health news

अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल बदलाव अब मरीज की मेडिकल हिस्ट्री दर्ज करने से आगे बढ़कर बीमारी के पैटर्न को समझने की दिशा में बढ़ रहा है। देश में 122 करोड़ 95 लाख से ज्यादा हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जुड़ने के बाद अब सरकार इस विशाल स्वास्थ्य डेटा का इस्तेमाल एक तरह से देश में बीमारियों का डिजिटल नक्शा बनाने में करने जा रही है। इससे यह पता चलेगा कि किस इलाके में कौन-सी बीमारी बढ़ रही है, किन बीमारियों का दबाव ज्यादा है और इलाज के नतीजे कैसे बदल रहे हैं। इसके लिए एआई की मदद लेने की तैयारी है। इससे क्षेत्र विशेष में बढ़ रही बीमारियों के कारण की तह तक जाने का रास्ता भी खुलेगा। रेटिनोपैथी, टीबी स्क्रिनिंग, कैंसर स्क्रीनिंग के लिए कुछ पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहे है।

बीमारी के ‘हॉटस्पॉट’ की निगरानी

एआई आधारित विश्लेषण से अलग-अलग क्षेत्रों में बीमारी के ट्रेंड को लगातार मॉनिटर किया जा सकेगा। इससे संक्रामक बीमारियों के अलावा डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर और सांस से जुड़ी बीमारियों जैसी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ की भी पहचान की जा सकती है। सरकार जिले और राज्य स्तर पर हेल्थ रिस्क मैपिंग कर सकेगी। ऐसे नक्शे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्राथमिकता तय करने, स्क्रीनिंग अभियान चलाने और स्थानीय स्तर पर रोकथाम की रणनीति बनाने में इस्तेमाल हो सकते हैं।

जहां जरूरत वहां ज्यादा बजट

डिजिटल हेल्थ डेटा का इस्तेमाल भविष्य में स्वास्थ्य बजट और संसाधनों के आवंटन को ज्यादा डेटा-आधारित बनाने में किया जाएगा। अभी कई स्वास्थ्य योजनाओं में संसाधनों की जरूरत का आकलन जनसंख्या, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और पिछले आंकड़ों के आधार पर होता है। डिजिटल रिकॉर्ड से बीमारी के वास्तविक बोझ और इलाज की मांग का ज्यादा विस्तृत आकलन संभव हो सकता है। यानी जिस जिले में किसी बीमारी का दबाव बढ़ रहा है, वहां दवाओं, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती को उसी अनुपात में प्राथमिकता देने का मॉडल विकसित किया जा सकता है।

इलाज की गुणवत्ता भी होगी मापने योग्य

यह पहल केवल बीमारी के आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं होगी। अलग-अलग उपचारों के बाद मरीजों के परिणामों का विश्लेषण कर यह देखा जा सकेगा है कि किस बीमारी में कौन-सा उपचार कितना प्रभावी रहा और किन परिस्थितियों में मरीजों के नतीजे बेहतर रहे। इससे सरकार के लिए हेल्थकेयर क्वालिटी और आउटकम-बेस्ड पॉलिसी की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। यानी सिर्फ कितने मरीजों का इलाज हुआ, यह गिनने के बजाय इलाज के बाद मरीज की स्थिति कैसी रही, इसका भी आकलन किया जाएगा।

राज्यवार डेटा से बदलेगी स्वास्थ्य प्राथमिकता

सरकार के पास अब अलग-अलग राज्यों के डिजिटल हेल्थ सिस्टम को जोड़ने का आधार भी तैयार हो रहा है। गुजरात का टेको प्लस, उत्तर प्रदेश का ईकवच और राजस्थान का पीसीटीएस/आईएचएमएस, तमिलनाडु का सीएमसीएचआईएस, इसके अलावा पीएम-जेएवाई, निक्षय, आरसीएच और गैर-संचारी रोग कार्यक्रम जैसे प्लेटफॉर्म एबीडीएम से जोड़े जा चुके हैं। 450 से ज्यादा सरकारी और निजी हेल्थ टेक समाधान भी एबीडीएम इकोसिस्टम से इंटीग्रेट हो चुके हैं।

पुराने सिस्टम से जुड़ेगा नया सिस्टम

देश में बीमारी की निगरानी के लिए पहले से इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) चल रहा है। हाल ही केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ नए सार्वजनिक स्वास्थ्य सर्विलांस डिजाइन पर भी चर्चा की है। साथ ही मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट और वेस्टवॉटर सर्विलांस जैसे सिस्टम पर काम हो रहा है। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और इस मौजूदा सर्विलांस व्यवस्था को जोड़ना बीमारी के शुरुआती संकेत पकड़ने में अहम हो सकता है।

गोपनीयता बनाए रखने पर जोर

मरीज का डेटा गोपनीय रहे इसके लिए सिक्योर डेटा एन्वायर्नमेंट (एसडीई) शुरू किया है। इसमें शोधकर्ताओं और अधिकृत संस्थाओं को सिक्योर्ड एन्वायर्नमेंट स्वास्थ्य डेटा के विश्लेषण की सुविधा मिलेगी ताकि संवेदनशील डेटा की अनावश्यक कॉपी या सीधे बाहर ले जाने की जरूरत न पड़े। इसके साथ ही साही- स्ट्रेटेजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इन हेल्थकेयर फोर इंडिया एआई के सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रमाण-आधारित इस्तेमाल का राष्ट्रीय ढांचा है। बोध- बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फोर हेल्थ एआई अलग-अलग वास्तविक स्वास्थ्य डेटा पर एआई मॉडलों की सटीकता, मजबूती, पक्षपात और उपयोगिता को जांचता है।

प्रमुख एआई पहल

पहल इस्तेमाल
मधुनेत्र एआई डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग
कॉफ अंगेस्ट टीबी(सीए-टीबी) खांसी की आवाज से टीबी स्क्रीनिंग
एआई चेस्ट एक्सरे एक्स-रे में टीबी/अन्य असामान्यता की पहचान
सीडीएसएस ई- संजीवनी संभावित निदान और क्लिनिकल निर्णय में सहायता
साही हेल्थ एआई के लिए राष्ट्रीय नीति और गवर्नेंस ढांचा
बोध एआई मॉडल की जांच और बेंचमार्किंग
कैच कैंसर स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस में एआई समाधान

प्रमुख आंकड़े

आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट- (आभा)98,16,91,456
हेल्थ रिकॉर्ड लिंक1,22,95,60,217
आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन पर पंजीकृत हेल्थ फैसिलिटी5,86,903
मान्यताप्राप्त हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स 12,45,270


Updated on:
08 Oct 2026 01:41 pm
Published on:
08 Oct 2026 01:41 pm
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