नई दिल्ली। श्रीलंका की संसद के इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेटेजिक इश्यूज पर संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एस. एम. मरिक्कार के नेतृत्व में श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान बिरला ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। 2047 […]
नई दिल्ली। श्रीलंका की संसद के इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेटेजिक इश्यूज पर संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एस. एम. मरिक्कार के नेतृत्व में श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान बिरला ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के दृढ़ संकल्प के साथ भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्रीलंका भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है। दोनों देश हजारों वर्षों से चली आ रही सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को साझा करते हैं। बिरला ने पिछले एक दशक में भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि निरंतर अनुसंधान और नवाचार ने देश भर में मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने देश में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में हुई प्रगति के साथ-साथ संसदीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में नवाचार और प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने राज्यों को जोडऩे वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया है। साथ ही बंदरगाहों और हवाई अड्डों का भी उल्लेखनीय विस्तार किया है, जो देश की वृद्धि और विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत सहयोग आपसी प्रगति और साझा समृद्धि को बढ़ावा दे सकता है। दोनों पक्षों ने यह भी माना कि बुनियादी ढांचा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया क्षेत्र बन सकता है। बिरला ने प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि दोनों सांसदों के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए 11 सदस्यीय भारत श्रीलंका संसदीय मैत्री समूह का गठन किया गया है। बिरला ने जवाबदेही और प्रभावी शासन सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने आवास और शहरी मामलों की संसदीय समिति के साथ संवाद किया।