
AI से बना हुआ प्रतीकात्मक फोटो
Toll tax: भारत के राजमार्गों को डिजिटल और जाम-मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर मुंडका-बक्करवाला में देश के अत्याधुनिक मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल प्लाजा का उद्घाटन किया है। गुजरात के बाद अब दिल्ली इस तकनीक को अपनाने वाला अगला प्रमुख राज्य बन गया है, जिससे अब टोल पर गाड़ियों की लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक ऐसी तकनीक है जिसमें सड़क पर कोई फिजिकल बैरियर (टोल नाका) नहीं होता। गाड़ियां बिना रुके अपनी सामान्य गति से टोल पॉइंट से गुजर सकती हैं। टोल गेट पर लगे हाई-रेजोल्यूशन ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेते हैं। इसके साथ ही सिस्टम वाहन के एक्सल, आकार और वजन के आधार पर उसकी श्रेणी की पहचान करता है। जैसे ही गाड़ी गुजरती है, उसका टोल शुल्क सीधे उसके FASTag अकाउंट से कट जाता है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित है।
NHAI ने इस नई व्यवस्था के लिए कुछ कड़े नियम और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार, यदि आपके FASTag में बैलेंस कम है या टैग काम नहीं कर रहा है, तो वाहन मालिक को तुरंत एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिससे वाहन स्वामी को पता ल जाएगा कि उनके खाते में पैसे कम है।
यूजर के पास बकाया टोल जमा करने के लिए 72 घंटे का समय होगा। यदि इस समय के भीतर भुगतान कर दिया जाता है, तो केवल वास्तविक टोल राशि ही देनी होगी। यदि 72 घंटे के बाद भी भुगतान नहीं किया गया, तो वाहन मालिक को दोगुना टोल शुल्क जुर्माने के तौर पर देना होगा। ANPR कैमरों द्वारा सटीक पहचान के लिए वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) होना आवश्यक है।
नितिन गडकरी ने इस तकनीक पर जोर देते हुए कहा कि इससे 'इज ऑफ लिविंग' और 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा। पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकने और चलने (Start-Stop) के कारण भारी मात्रा में ईंधन बर्बाद होता है और प्रदूषण बढ़ता है। बैरियर-लेस टोलिंग से न केवल समय बचेगा, बल्कि वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
Updated on:
12 May 2026 12:57 pm
Published on:
12 May 2026 12:57 pm
