
INDIA Alliance Rally Delhi: दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई INDIA गठबंधन की रैली अब सियासी बहस का मुद्दा बन गई है। रैली में कितने लोग पहुंचे और इसका आयोजन कितना सफल रहा, इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। बीजेपी ने खाली कुर्सियों और मैदान के कुछ हिस्सों का हवाला देकर इसे फ्लॉप शो बताया है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि रैली में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने तो दावा किया है कि मैदान के बाहर मौजूद लोगों की संख्या अंदर बैठे लोगों से करीब दोगुनी थी।
सोमवार को इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमोद तिवारी ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रैली की सफलता का अंदाजा केवल मैदान के अंदर मौजूद लोगों को गिनकर नहीं लगाया जा सकता। यह भी देखना चाहिए कि वहां पहुंचे लोगों में कितना उत्साह था और वे किस मकसद से जुटे थे। तिवारी के मुताबिक, राहुल गांधी जब दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ रैली में शामिल होने पहुंचे तो सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी हुई थी।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैदान के बाहर लोगों की संख्या अंदर मौजूद लोगों से लगभग दोगुनी थी। उन्होंने बीजेपी पर झूठे दावे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रैली में शामिल लोगों का उत्साह साफ नजर आ रहा था। तिवारी ने इसे आजादी के बाद की सबसे सफल रैली बताते हुए कहा कि इसकी कामयाबी को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि वहां मौजूद लोगों के जोश और उनके संकल्प से समझना चाहिए।
दरअसल, रविवार को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली का आयोजन किया था। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए। रैली में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
रैली के बाद बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से 10 लाख लोगों के पहुंचने की बात कही गई, जबकि मैदान में कई जगह कुर्सियां खाली थीं। पात्रा ने रैली को फ्लॉप बताते हुए कहा कि तस्वीरों और वीडियो में भी मैदान के कई हिस्से खाली नजर आ रहे थे। बीजेपी की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है।
बीजेपी के इन आरोपों पर जवाब देते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि रैली में आए लोगों का मकसद केवल किसी नेता को सुनना नहीं था। वे संविधान और लोकतंत्र को लेकर अपनी आवाज उठाने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद लोगों का संकल्प बीजेपी को सत्ता से हटाकर संविधान में विश्वास रखने वाली सरकार लाने का था।
अब दिल्ली की इस रैली के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी इसे कमजोर आयोजन बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनता के समर्थन और विपक्ष की एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन मान रही है।