नई दिल्ली। भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में बड़ी छलांग की घोषणा की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश अपनी मौजूदा 38,000 जीपीयू की क्षमता के अलावा आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़ेगा। इसका मकसद राष्ट्रीय एआइ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और स्वदेशी एआइ […]
नई दिल्ली। भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में बड़ी छलांग की घोषणा की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश अपनी मौजूदा 38,000 जीपीयू की क्षमता के अलावा आने वाले हफ्तों में 20,000 और जीपीयू जोड़ेगा। इसका मकसद राष्ट्रीय एआइ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और स्वदेशी एआइ मॉडलों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
मंत्री ने पत्रकार वार्ता में कहा कि भारत की एआइ रणनीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण के विजन को दर्शाती है। सरकार को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में एआई क्षेत्र में 200 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आएगा।
मंत्री ने बताया कि कई भारतीय सॉवरेन एआइ मॉडल का अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परीक्षण किया गया और कई मामलों में वे बड़े वैश्विक मॉडलों से बेहतर पाए गए। स्टेनफॉर्ड विश्वविद्यालय की रैंकिंग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के शीर्ष तीन एआइ देशों में शामिल है।
समिट के पहले दिन 2.5 लाख से अधिक छात्रों ने जिम्मेदार एआइ उपयोग की शपथ ली, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
वैष्णव ने फिर दोहाराया कि नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, मेटा या एक्स सभी को भारत के कानून और संविधान के अनुसार ही संचालन करना होगा। यह बिल्कुल स्पष्ट है। यह एक वैश्विक मानक है। सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसे समझती हैं और यह एक स्थापित कानूनी स्थिति है।