
CJP Jantar Mantar Protest: देश में हाल ही में हुए परीक्षा घोटालों और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब और बड़ा रूप लेता जा रहा है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले युवाओं और छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसे अब समाज के अन्य बड़े आंदोलनों का भी साथ मिलने लगा है। इसी बीच, मशहूर पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में आते हुए सरकार को देशव्यापी भूख हड़ताल शुरू करने की कड़ी चेतावनी दे दी है, जिससे इस आंदोलन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
जंतर-मंतर पर जारी इस विरोध प्रदर्शन में आज उस समय नया मोड़ आ गया जब लद्दाख के मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे सोनम वांगचुक ने छात्रों के इस आंदोलन को अपना समर्थन देने का एलान किया। वांगचुक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणालियों में सुधार पर सरकार ने तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे छात्रों के हक के लिए एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। उनके इस रुख ने शिक्षा मंत्रालय पर चौतरफा दबाव बढ़ा दिया है।
प्रदर्शन के दूसरे दिन भी युवाओं का रचनात्मक विरोध चर्चा का विषय बना रहा। सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में जुटे प्रदर्शनकारियों ने गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए पारंपरिक नारों की बजाय सोशल मीडिया पर लोकप्रिय मीम्स और पॉप कल्चर का सहारा लिया। प्रदर्शन में टीवी शो 'साथ निभाना साथिया' के चर्चित 'गोपी बहू लैपटॉप धोने' वाले मीम के जरिए एनटीए की तकनीकी खामियों और डेटा सुरक्षा पर सवाल उठाए गए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से जुड़े वायरल '#Melodi' ट्रेंड पर भी कटाक्ष किया गया। एक पोस्टर पर लिखा था कि पेपर लीक कब बंद होगा? मेलोडी खाओ, खुद जान जाट', जिसने प्रदर्शनकारियों और राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
इस आंदोलन में सबसे खास बात यह है कि इसकी कमान पूरी तरह से देश के युवाओं और छात्रों के हाथ में है। जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पारंपरिक और उबाऊ रैलियों के बजाय आज की भाषा (मीम्स) में सरकार से संवाद कर रहे हैं ताकि देश के हर युवा को इस लड़ाई से जोड़ा जा सके। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना और तेज होता रहेगा।