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Delhi doctor maid murder case: काम करते समय अक्सर पीछे-पीछे घूमते थे, दिल्ली मर्डर से पहले मीना ने रामवती से बयां किया था डॉक्टर का बदला व्यवहार

Mount Kailash murder: दिल्ली के एक इलाके में नौकरानी की हत्या की खबर सुनने के बाद से घरेलू सहायिका मीना को जानने-पहचानने वाले सभी इस घटना से दुखी हैं। आरोपी डॉक्टर के घर के बाद जिन दूसरों घर में काम करने जाती थी उन लोगों ने बताया कि माना ने आरोपी मनीष के बारे में क्या बताया।

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मीना ने कुछ दिन पहले ही डॉ, मनीष के बदलते व्यवहार के बारे में रमावती को बताया था। फोटो x

Mount Kailash murder: दिल्ली की रहने वाली मीना की रोज की दिनचर्या आम दिनों की तरह ही होती थी। 25 सालों से मीना सुबह-सुबह घर से निकल जाती थी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश में काम करने के बाद शाम तक दूसरों के घरों में काम करने चले जाती। 45 साल की इस घरेलू सहायिका को जानने वाले लोग उन हालात को समझने की कोशिश कर रहे हैं। जिनकी वजह से गुरुवार को माउंट कैलाश स्थित घर पर कथित तौर पर डॉ. मनीष गुप्ता ने उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद से मीना के जानने और काम पर रखने वाले लोगों का कहना है कि मीना एक ऐसी महिला थी जो किसी से भी ज्यादा बात नहीं करती थी। जिन घरों में काम करती थीं, उनके बारे में भी शायद ही कभी कुछ कहती थीं। हालांकि, 20 साल से जानने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि मीना ने कुछ दिन पहले ही गुप्ता के बदलते व्यवहार को लेकर कुछ चिंता जताई थी।

'काम करते समय अक्सर पीछे-पीछे घूमते थे'

माउंट कैलाश में कपड़े प्रेस करने वाली रामवती ने बताया कि मीना हमेशा गुप्ता की पत्नी की तारीफ करती थीं। रामवती ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को बताया था कि कुछ दिन से डॉक्टर साहब ज्यादा ही नजर रखने लगे हैं और काम करते समय अक्सर पीछे-पीछे घूमते थे। उन्होंने बताया कि जब डॉक्टर का बेटा घर पर होता था, तो उन्हें मीना के काम करने से दिक्कत होती थी। डॉक्टर का कहना होता था कि सब काम नजर रखकर ही करवाया जाए।

घर का गुजारा मीना के बदौलत होता था

मीना अपने बेटे रॉबिन और बहू के साथ गढ़ी के कल्लू मोहल्ला में रहती थीं। वह दो दशक से भी ज्यादा समय पहले पश्चिम बंगाल से दिल्ली आई थीं और तब से अपने परिवार का गुज़ारा कर रही थीं। उनके पति, जो गांव में किसान हैं, इतने बीमार हैं कि मीना के अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली नहीं आ सकते। मीना की गांव में एक बेटी भी है। मीना तीन घरों में काम करती थीं। डॉ. गुप्ता के घर, उसी बिल्डिंग में एक बुजुर्ग जोड़े के फ्लैट में, और ईस्ट ऑफ कैलाश के ही संत नगर में एक घर में।

मां की कमाई से इलाज चल रहा था

रॉबिन ने बताया कि उनकी मां की कमाई से उनकी पत्नी के फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा, हम 10 साल से बच्चे के लिए कोशिश कर रहे हैं। मेरी मां को उम्मीद थी कि अगले साल तक वह दादी बन जाएंगी, लेकिन अब वह यह देखने के लिए जिंदा नहीं हैं।

'कभी ऐसा नहीं दिखाया कि असुरक्षित महसूस हो रहा'

जिस बुजुर्ग जोड़े के घर मीना ने करीब आठ साल तक काम किया था, उन्होंने कहा कि वह परिवार के सदस्य जैसी थीं। महिला ने कहा, वह पहले हमारे घर आती थी और फिर ऊपर उनके फ्लैट में चली जाती थी। उसने कभी ऐसा नहीं दिखाया कि उसे असुरक्षित महसूस हो रहा है।

'मानसिक बीमारी के बारे में क्यों नहीं बताया'

मीना के परिवार ने पूछा कि गुप्ता की मानसिक बीमारी के बारे में किसी ने उन्हें क्यों नहीं बताया। रॉबिन ने पूछा, अगर लोगों को पता था कि वह बीमार है और दवाइयां नहीं ले रहा है, तो मेरी मां को वहां खतरनाक स्थिति में अकेला क्यों छोड़ दिया गया?परिवार को यह भी लगा कि क्या कोई और बीच-बचाव कर सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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