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दिल्ली का शाहदरा स्टेशन, 2 मिनट का स्टॉपेज और दो बच्चों के पिता पंकज धामा की हत्या! योगा एक्सप्रेस में क्या हुआ

Shahdara Station Crime: दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने-उतरने के विवाद में दिल्ली मेट्रो के सुरक्षा गार्ड पंकज धामा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 13 साल से नौकरी कर रहे पंकज अपने पीछे पत्नी, डेढ़ साल की बेटी और 5 साल के बेटे को छोड़ गए। पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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Yoga Express Murder

8 लड़कों ने लात-घूंसों से हमला किया, प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े पंकज (Photo: X/IANS)

Pankaj Dhama Delhi Metro Guard: शनिवार का दिन पंकज धामा के परिवार के लिए किसी आम दिन की तरह ही शुरू हुआ था। दिल्ली मेट्रो में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 34 वर्षीय पंकज रोज की तरह ड्यूटी पर गए थे। उन्हें क्या पता था कि घर लौटने के दौरान शाहदरा रेलवे स्टेशन पर हुई एक मामूली बहस उनकी जिंदगी की आखिरी लड़ाई बन जाएगी। हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद काफी समय तक पंकज प्लेटफॉर्म पर तड़पता रहा और भीड़ तमाशबीन बनी रही। एक

पूर्वी दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर योगा एक्सप्रेस से चढ़ने और उतरने को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही मिनटों में इतनी हिंसक मारपीट में बदल गया कि पंकज धामा की जान चली गई। पंकज धामा शाहदरा स्टेशन पर उतरने की कोशिश कर रहे थे, जबकि आरोपी युवकों का समूह उसी योगा एक्सप्रेस में चढ़ रहा था।

घटना के बाद रेलवे पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपी घटना के बाद उसी ट्रेन से आगे की यात्रा पर निकल गए थे।

13 साल तक यात्रियों की सुरक्षा की, लेकिन खुद को नहीं बचा सके

पंकज धामा पिछले 13 वर्षों से दिल्ली मेट्रो में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम कर रहे थे। उनकी तैनाती आईपी एक्सटेंशन मेट्रो स्टेशन पर थी। आमतौर पर उनकी ड्यूटी रात की शिफ्ट में रहती थी। ड्यूटी खत्म होने के बाद वह रोज की तरह शाहदरा स्टेशन पर आते थे और ट्रेन पकड़कर अपने गांव बागपत जाते थे।

शनिवार को भी वह घर लौटने के लिए योगा एक्सप्रेस से शाहदरा तक का सफर कर रहे थे। वह शाहदरा पहुंचे ही थे। लेकिन प्लेटफॉर्म पर मौजूद भारी भीड़ के बीच सब कुछ बदल गया।

34 मिनट ट्रेन लेट, वीकेंड के चलते ज्यादा थी भीड़

उत्तर रेलवे के अनुसार, दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर रविवार सुबह 6:03 बजे यात्रियों के बीच हाथापाई की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही जीआरपी के जवान तत्काल कार्रवाई करते हुए सुबह 6:07 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए और विवाद में शामिल लोगों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस दौरान पंकज नामक एक व्यक्ति अचानक प्लेटफॉर्म पर गिरकर बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में शामिल सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया है। घटना की विस्तृत जांच जारी है।

जानकारी के मुताबिक, योगा एक्सप्रेस सुबह 5:19 बजे शाहदरा पहुंचती है, लेकिन शनिवार को करीब 34 मिनट देरी से चल रही थी। ट्रेन के पहुंचते ही प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पंकज को ट्रेन से उतरना था, जबकि आरोपी युवक ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।

इसी दौरान गेट पर धक्का-मुक्की को लेकर बहस शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और सात से आठ युवकों के समूह ने पंकज धामा को घेर लिया।

भीड़, धक्का-मुक्की और फिर… प्लेटफॉर्म पर ही थम गईं सांसें

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पंकज धामा के साथ बेरहमी से मारपीट की। उन्हें मुक्कों और लातों से पीटा गया। इस दौरान एक रेलवे पुलिस का जवान पंकज को बचाने आया। उसने आरोपी लड़कों को धकेलकर हटाया। हमले के दौरान पंकज प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आरोप है कि न तो किसी रेलवे कर्मचारी और न ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने पंकज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। इस वजह से पंकज ने दम तोड़ दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में भी कुछ लोग पंकज धामा को घेरकर मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो उसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी यात्री ने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था।

परिवार का आरोप- समय पर मदद मिलती तो बच जाती जान

पंकज की मौत के बाद परिवार का गुस्सा भी सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि रेलवे अधिकारियों की ओर से समय पर मदद नहीं मिली। परिवार के सदस्यों का कहना है कि पंकज को अस्पताल पहुंचाने का काम रेलवे कर्मचारियों ने नहीं, बल्कि कुछ यात्रियों ने किया। उसे एंबुलेंस से अस्पताल नहीं ले जाया गया। उनका आरोप है कि अगर घायल पंकज को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल जाती तो उनकी जान बच सकती थी।

पीछे छूट गया पूरा परिवार

पंकज धामा की मौत ने सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी नहीं छीनी, बल्कि एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया है। घर में वृद्ध पिता हैं, जो किसान हैं, मां गृहिणी हैं। पत्नी पूजा अब अचानक आई इस त्रासदी के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी के साथ अकेली रह गई हैं। पंकज की डेढ़ साल की बेटी अभी ठीक से अपने पिता को बुलाना भी नहीं सीख पाई थी, जबकि पांच साल का बेटा अब तक यह समझ नहीं पाया है कि पिता घर लौटकर क्यों नहीं आए। पंकज का एक छोटा भाई भी दिल्ली मेट्रो में नौकरी करता है।

कुछ घंटों में पुलिस ने दबोचे 8 आरोपी

घटना के बाद दिल्ली पुलिस और रेलवे पुलिस ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई।

पुलिस को पता चला कि मारपीट के बाद आरोपी उसी ट्रेन से आगे की यात्रा पर निकल गए थे। इसके बाद टीम ने 2 घंटे में ही मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर आठ आरोपियों को दबोच लिया। सभी को दिल्ली लाकर पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद किस वजह से इतना हिंसक हो गया।

शाहदरा स्टेशन की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि भीड़ के बढ़ते गुस्से और असहिष्णुता की भी भयावह तस्वीर पेश करती है। महज ट्रेन में चढ़ने और उतरने को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ मिनटों में एक परिवार के लिए आजीवन दर्द बन गया।

जो व्यक्ति वर्षों तक हजारों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्यूटी करता रहा, वह खुद सार्वजनिक जगह पर हिंसा का शिकार हो गया। अब उसके घर में सिर्फ इंतजार, आंसू और उन कदमों की याद बची है, जो रोज ड्यूटी से लौटकर घर के दरवाजे तक पहुंचते थे।

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