
Jyotiraditya Scindia on UPI: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। सिंधिया ने कहा कि UPI लेनदेन पर ग्राहक से किसी तरह का शुल्क लेने की सिफारिश नहीं की गई है और ऐसा करना नियमों का उल्लंघन होगा। उन्होंने राहुल गांधी की अमेरिका से जुड़े दबाव की टिप्पणी पर भी निशाना साधा।
ANI से बातचीत में सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह ‘अमेरिका का भूत’ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि देश के विकास पर ध्यान देने के बजाय नकारात्मक सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है। सिंधिया ने कहा कि सरकार सकारात्मक सोच के साथ देश को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रही है।
UPI के नए MDR ढांचे को लेकर सिंधिया ने स्पष्ट किया कि इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, शुल्क केवल निर्धारित श्रेणी के व्यापारियों से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों का UPI के जरिए मासिक लेनदेन एक लाख रुपये से अधिक है, उनमें भी यह व्यवस्था सीमित लेनदेन पर लागू होगी। सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, 2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा, जबकि 2,000 से अधिक के निर्धारित P2M लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। 75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन अधिकतम 300 की सीमा होगी।
सिंधिया ने कहा कि UPI पर होने वाले करीब 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन नए MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। उन्होंने कहा कि 2,000 तक के भुगतान पर शुल्क शून्य रहेगा। सरकार के मुताबिक, QR कोड के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी भी जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आते हैं। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा।
सरकार के नए ढांचे के अनुसार रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। सिंधिया ने कहा कि UPI को लंबे समय तक मजबूत और आत्मनिर्भर डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाने के लिए MDR व्यवस्था लाई गई है। उन्होंने पारंपरिक भुगतान माध्यमों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रेडिट कार्ड पर ट्रांजैक्शन लागत करीब 1.5 से 2.5 फीसदी और डेबिट कार्ड पर करीब 0.9 फीसदी तक हो सकती है, जबकि UPI के निर्धारित मर्चेंट लेनदेन के लिए दर 0.4 फीसदी रखी गई है।
राहुल गांधी ने प्रस्तावित UPI MDR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि यह व्यवस्था अमेरिकी दबाव के कारण लाई जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से UPI शुल्क वापस लेने की मांग की थी। इसी के जवाब में सिंधिया ने कहा कि सरकार ने MDR लागू करने के पीछे डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संचालन और उसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाने का तर्क दिया है। उनके मुताबिक, शुरुआत में UPI के निर्माण और संचालन की लागत सरकार ने करदाताओं के पैसे से वहन की थी, जबकि अब सिस्टम को अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए मर्चेंट-आधारित शुल्क व्यवस्था तैयार की गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। यह राशि UPI इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और ऐप प्रदाताओं समेत संबंधित पक्षों के बीच वितरित की जाएगी। इसका उद्देश्य UPI के संचालन, तकनीकी ढांचे, सुरक्षा और विस्तार को समर्थन देना है। नया UPI MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और इसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन तक सीमित रहेगा।