
Jantar Mantar (File Photo-IANS)
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि किसी प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है? कोर्ट ने पुलिस से कहा कि प्रदर्शन की अनुमति देते हुए उस पर जरूरी शर्तें और पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने राज शेखावत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। करणी सेना ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए इक्विटी नियमों के विरोध में 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने क्षेत्र की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में 20 सितंबर को प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी, लेकिन बाद में अपना फैसला बदल दिया। पुलिस के पत्र में बड़ी संख्या में लोगों के प्रदर्शन में पहुंचने की आशंका का हवाला दिया गया था। प्रस्तावित प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होना था।
लाइव लॉ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि केवल इस आधार पर प्रदर्शन की अनुमति से इनकार कैसे किया जा सकता है कि कुछ लोगों के आने की आशंका है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन पर आवश्यक शर्तें लगाई जा सकती हैं और प्रदर्शनकारियों को कुछ घंटों के लिए वहां रहने की अनुमति दी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी विभिन्न दिशानिर्देशों और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए जारी स्थायी आदेशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर बेहद संवेदनशील इलाका है। पुलिस ने केवल याचिकाकर्ता के प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार नहीं किया है, बल्कि अन्य लोगों के प्रदर्शनों को भी अनुमति नहीं दी गई है। एएसजी ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर होने वाले प्रचार और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका का भी हवाला दिया।
कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या प्रदर्शन के लिए जगह बदली जा सकती है और फिर अनुमति दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि प्रदर्शन पर आवश्यक शर्तें लगाई जा सकती हैं। यदि जंतर-मंतर उपयुक्त जगह नहीं है तो पुलिस कोई दूसरी जगह सुझा सकती है। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर जंतर-मंतर नहीं, तो कोई दूसरी जगह सुझाइए। मैं सिर्फ राज्य से पूछ रही हूं कि पूरी तरह प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है? एएसजी द्वारा स्थान बदलने के विकल्प पर विचार करने की बात स्वीकारने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए तय कर दी है।
Updated on:
17 Sept 2026 02:41 pm
Published on:
17 Sept 2026 02:38 pm
