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नवोदय विद्यालयों पर सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु सरकार को दो टूक, हिंदी को लेकर ‘सोच बदलने’ की नसीहत

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से हिंदी शिक्षा को लेकर अपना रुख बदलने और केंद्र के साथ सहयोग करने को कहा। कोर्ट ने सहकारी संघवाद पर जोर देते हुए केंद्र और राज्य को बातचीत से समाधान निकालने की सलाह दी।
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भारत

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Ashib Khan

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Updated: 17 Sep 2026, 4:24 PM IST

Supreme Court CEC EC appointment law

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

Supreme Court Tamil Nadu Hindi: तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के रुख पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उसे स्कूलों में हिंदी पढ़ाए जाने को लेकर अपनी सोच बदलनी होगी। इस मामले में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने सुनवाई की। तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता और केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज पेश हुए।

कोर्ट ने कहा कि आपको अपनी सोच बदलनी होगी। ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित सह-शिक्षा और आवासीय विद्यालय हैं। इनका संचालन शिक्षा मंत्रालय के अधीन नवोदय विद्यालय समिति करती है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से राज्य में इन विद्यालयों की स्थापना का विरोध करती रही है।

तमिलनाडु सरकार की प्रमुख आपत्ति इन विद्यालयों में लागू तीन-भाषा नीति को लेकर है। तमिलनाडु में राज्य की शिक्षा नीति के तहत दो-भाषा व्यवस्था लागू है, जबकि नवोदय विद्यालयों में हिंदी समेत तीन भाषाओं की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई है।

'चेन्नई को दिल्ली से अलग-थलग नहीं करना चाहिए'

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने देश में सहकारी संघवाद की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि चेन्नई में बैठे लोगों को दिल्ली में बैठे लोगों से अलग-थलग नहीं होना चाहिए और न ही दिल्ली को चेन्नई से अलग होना चाहिए।

पीठ ने कहा कि राज्य में जो अच्छे काम हो रहे हैं, उनके साथ कुछ अतिरिक्त जुड़ जाने से शिक्षा का स्तर कम नहीं होगा। अदालत ने कहा कि दिल्ली से आने वाली कोई व्यवस्था चेन्नई के मानकों को कम नहीं करती।

तमिलनाडु ने कहा- राज्य की नीति से टकराता है नवोदय मॉडल

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप ने कहा कि नवोदय विद्यालयों की नीति राज्य की शिक्षा नीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में तमिल भाषा की जगह हिंदी को प्राथमिकता मिलती है और संविधान का उद्देश्य इस तरह का एकरूपीकरण नहीं है।

वकील गुप्ता ने कहा कि नवोदय विद्यालय सीधे केंद्र सरकार के स्कूल नहीं हैं, बल्कि एक सोसायटी द्वारा संचालित किए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की दो-भाषा नीति के मुकाबले नवोदय की व्यवस्था अलग है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को भाषा नीति जैसे मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नवोदय विद्यालय राज्य की नीति के खिलाफ नहीं हैं और इस मामले में संवाद की जरूरत है।

'आप नीति स्वीकार नहीं करने की बात नहीं कह सकते'

तमिलनाडु सरकार की ओर से कहा गया कि शिक्षा नीति राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है और केंद्र की नीति को राज्य पर इस तरह लागू नहीं किया जा सकता। वकील ने यह भी कहा कि अगर अदालत ऐसा आदेश जारी करती है तो इससे पिछले 75 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था प्रभावित होगी।

इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की नीति को केवल यह कहकर खारिज नहीं किया जा सकता कि राज्य उसे स्वीकार नहीं करता।

'आज शिक्षा है, कल कोई और मुद्दा होगा'

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि वह अपने रुख में कठोरता न रखे। अदालत ने कहा- आज यह शिक्षा का मामला है, कल कोई और मामला हो सकता है। आपको अपने मन की इस कठोरता को कम करना होगा।

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि राज्य को केंद्र की योजना को अपनी योजना की तरह देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

तमिलनाडु ने उठाया केंद्र पर भुगतान का मुद्दा

राज्य सरकार के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि इन विद्यालयों का खर्च अंततः राज्य सरकार पर आ सकता है। उन्होंने केंद्र पर सर्व शिक्षा अभियान के तहत राज्य को भुगतान नहीं करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप नहीं है।

इस पर अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को आपस में बातचीत करनी चाहिए।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य सरकार को केवल विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध करानी है और बाकी व्यवस्था केंद्र सरकार करेगी।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य को यह धारणा नहीं रखनी चाहिए कि केंद्र के साथ सहयोग करने का मतलब केंद्र सरकार के सामने आत्मसमर्पण करना है।

अदालत ने बातचीत का रास्ता सुझाया

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार के प्रतिनिधियों को नवोदय विद्यालयों की स्थापना और इससे जुड़े नीतिगत मुद्दों पर आगे बातचीत करने को कहा है।

पीठ ने कहा कि अगर बातचीत के बाद भी कोई समस्या बनी रहती है तो राज्य सरकार उसे अदालत के सामने रख सकती है। अदालत ने कहा कि नवोदय विद्यालयों से छात्रों को अतिरिक्त अवसर मिलेंगे और इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का स्तर कम नहीं होगा।