
PM Modi and Donald Trump (Photo-ANI)
India US Tariff Timeline: नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले करीब डेढ़ साल से टैरिफ का मुद्दा लगातार सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामान पर कई बार टैरिफ बढ़ाए, जबकि भारत ने इसे अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ और अनुचित कदम बताया। अब अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है।
इसमें रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत भी इस प्रावधान के दायरे में है। भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद के इस पूरे घटनाक्रम में रूस से भारत की तेल खरीद भी एक अहम मुद्दा रही है। आइए जानते हैं फरवरी 2025 से सितंबर 2026 तक टैरिफ विवाद में कब-क्या हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई टैरिफ प्रणाली का ऐलान किया। इसके तहत भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर लगाए जाने वाले शुल्क के बराबर ही भारत पर भी शुल्क लगाने की बात कही गई। हालांकि, दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर सहमति जताई थी।
फरवरी के करीब दो महीने बाद अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया। हालांकि, ट्रंप ने बाद में इसके अमल पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी। इस दौरान भारत से अमेरिका जाने वाले सभी सामान पर 10 फीसदी शुल्क लागू रहा।
जुलाई 2025 में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को बढ़ाकर 25 फीसदी करने का फैसला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया। अगले ही महीने यानी अगस्त में अमेरिका ने टैरिफ को और बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया। भारत ने अमेरिकी टैरिफ को 'अनुचित' बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। भारत ने कहा था कि उसे अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। इस दौरान भारत की रूस से लगातार तेल खरीद भी अमेरिका और भारत के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा बनी रही। भारत का कहना था कि करीब 1.4 अरब आबादी वाले देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फरवरी 2026 में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ नरमी दिखाई दी। अमेरिका ने भारतीय आयात पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया। इसके बदले भारत से रूस से तेल खरीद रोकने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की अपेक्षा की गई। इसी दौरान दोनों देशों ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क भी जारी किया। इसके बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने वॉशिंगटन की आपातकालीन टैरिफ व्यवस्था को खारिज कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने भारत समेत कई देशों से होने वाले आयात पर 150 दिनों के लिए अस्थायी 10 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की।
150 दिनों की अवधि खत्म होने के बाद जुलाई 2026 में ट्रंप ने भारतीय आयात पर फिर से 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। अमेरिका की ओर से इसके लिए एक अन्य कारण बताया गया। अमेरिकी पक्ष ने भारत से आयात होने वाले ऐसे सामान को लेकर चिंता जताई, जिनके उत्पादन में कथित तौर पर जबरन मजदूरी का इस्तेमाल किया गया था।
सितंबर 2026 में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए प्रतिबंध और टैरिफ से जुड़ा विधेयक पारित किया। इसका उद्देश्य यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस पर दबाव बढ़ाना और ईरान पर भी प्रतिबंधों का विस्तार करना है। इस कानून ने ट्रंप को भारत समेत कई देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी दिया, ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम की जा सके।
प्रतिबंध बिल को अमेरिकी सदन से मंजूरी मिलने के बाद भारत ने कहा कि उसने पहले ही वॉशिंगटन को आगाह किया था कि इस तरह के कदम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। भारत ने यह भी कहा कि वह इस बिल के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए व्यापार और उद्योग से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा।
Updated on:
17 Sept 2026 06:33 pm
Published on:
17 Sept 2026 05:35 pm
