
सुप्रीम कोर्ट (फोटो- ANI)
Supreme Court Advocate Enrolment: सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की एलएलबी पूरी कर चुके उन छात्रों को बड़ी राहत दी है, जिनकी एलएलबी की पढ़ाई रेगुलर मोड से हुई है, लेकिन उससे पहले की बैचलर डिग्री ओपन, डिस्टेंस या कॉरेस्पॉन्डेंस मोड से होने के कारण उनका एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट रोक दिया गया था। कोर्ट ने तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल को संबंधित आवेदकों का प्रोविजनल एनरोलमेंट करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया। मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के रूल 5 की व्याख्या और उसके लागू होने से जुड़ा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि रूल 5 की व्याख्या को लेकर अंतिम फैसला अभी नहीं किया गया है और इस मुद्दे पर अंतिम सुनवाई में विचार होगा।
मामले में शामिल आवेदकों ने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. बीआर अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से बैचलर डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने BCI से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से तीन साल का एलएलबी कोर्स रेगुलर मोड में पूरा किया।इसके बावजूद तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल ने उनके एडवोकेट एनरोलमेंट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। इसकी वजह उनकी पहले की बैचलर डिग्री का ओपन या डिस्टेंस मोड से होना बताया गया।
एक अन्य आवेदक ने 2006 में मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस मोड में बीकॉम किया था। इसके बाद उन्होंने 2020 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज से रेगुलर मोड में एलएलबी पूरी की। तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल ने रूल 5 की अपनी व्याख्या के आधार पर उनके एनरोलमेंट आवेदन को खारिज कर दिया था। बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट ने भी 2024 में बार काउंसिल के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद संबंधित आवेदकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित लोगों ने मान्यता प्राप्त संस्थानों से तीन साल का एलएलबी कोर्स रेगुलर मोड में पूरा किया है। उनके एनरोलमेंट में रुकावट केवल इसलिए आई क्योंकि एलएलबी से पहले की बैचलर डिग्री उन्होंने ओपन या डिस्टेंस मोड से हासिल की थी। पीठ ने कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान एनरोलमेंट से लगातार इनकार करने पर संबंधित लोगों को अनावश्यक नुकसान हो सकता है और रेगुलर लॉ डिग्री पूरी करने के बावजूद वे कानूनी पेशे में एंट्री नहीं कर पाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उन्हें प्रोविजनल एनरोलमेंट देने का रास्ता अपनाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रोविजनल एनरोलमेंट स्थायी अधिकार नहीं बनाएगा। यह संबंधित सिविल अपीलों के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगा। इसके अलावा एनरोलमेंट से पहले संबंधित डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन और अन्य जरूरी शर्तों को पूरा करना होगा।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रोविजनल एनरोलमेंट से संबंधित लोगों के पक्ष में कोई स्थायी कानूनी अधिकार या लाभ पैदा नहीं होगा। अंतिम फैसला आने के बाद उसी के अनुसार उनकी स्थिति तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस अंतरिम आदेश के जरिए BCI के रूल 5 की अंतिम व्याख्या नहीं की है। यानी ओपन या डिस्टेंस मोड से हासिल की गई बैचलर डिग्री के आधार पर तीन वर्षीय एलएलबी करने वालों के स्थायी एनरोलमेंट को लेकर कानूनी सवाल अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।
Updated on:
17 Sept 2026 04:50 pm
Published on:
17 Sept 2026 04:39 pm
